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जैविक/प्राकृतिक खेती

कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली में किसान जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन मौसम आधारित खेती व जलवायु परिवर्तन पर वैज्ञानिकों ने दिया मार्गदर्शन

Ramjee Kumar Ramjee Kumar
Updated 31 January, 2026 11:13 PM IST
कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली में किसान जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन  मौसम आधारित खेती व जलवायु परिवर्तन पर वैज्ञानिकों ने दिया मार्गदर्शन

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा परियोजना के तहत कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली में किसान जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मौसम आधारित कृषि परामर्श उपलब्ध कराकर खेती को अधिक लाभकारी, सुरक्षित और टिकाऊ बनाना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान भाई-बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. ए. के. सिंह, निदेशक अनुसंधान, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (बिहार) रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं अतिथियों के सम्मान के साथ हुई।


इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों में डॉ. आर. के. तिवारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली, डॉ. अब्दुस सत्तार, ग्रामीण कृषि मौसम सेवा परियोजना के नोडल पदाधिकारी, डॉ. दिनेश राय, सह प्राध्यापक, पादप रोग विभाग तथा डॉ. धीरू तिवारी, विषय विशेषज्ञ (उद्यानिकी), कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली शामिल रहे।


मुख्य अतिथि डॉ. ए. के. सिंह ने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन के दौर में कृषि अनुसंधान की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बदलते मौसम को ध्यान में रखकर वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना आज किसानों के लिए अनिवार्य हो गया है। उन्होंने मौसम अनुकूल फसल किस्मों, आधुनिक खेती पद्धतियों और तकनीकी नवाचारों पर जोर दिया।

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कार्यक्रम में डॉ. रविंद्र कुमार तिवारी ने पशुधन पर मौसम के प्रभाव तथा मौसम के अनुसार पशु देखभाल की वैज्ञानिक जानकारी दी। डॉ. दिनेश राय ने मौसम परिवर्तन के कारण बढ़ते फसल रोगों और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन के उपाय बताए। वहीं डॉ. धीरू तिवारी ने उद्यानिकी फसलों में मौसम आधारित तकनीकों के प्रयोग से उत्पादन और आय बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।


ग्रामीण कृषि मौसम सेवा परियोजना के नोडल पदाधिकारी डॉ. अब्दुस सत्तार ने परियोजना की उपयोगिता बताते हुए कहा कि मौसम आधारित कृषि सलाह किसानों को जोखिम कम करने और सही समय पर खेती से जुड़े निर्णय लेने में मदद करती है। इस अवसर पर डॉ. गुलाब सिंह ने मौसम आधारित खेती पर व्याख्यान देते हुए बताया कि मौसम पूर्वानुमान के आधार पर बुवाई, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन और फसल सुरक्षा से जुड़े निर्णय लेकर किसान उत्पादन बढ़ा सकते हैं और नुकसान से बच सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन भी उनके द्वारा किया गया। कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र से प्रेम कुमार, वसंत किशोर, रवि रंजन कुमार, जितेंद्र कुमार, चंदन कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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