बिहार में कृषि आधारित स्वरोजगार को मजबूती देने की दिशा में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केन्द्र, बिरौली द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। बिहार कौशल विकास प्रबंधन के तहत ‘गार्डेनर सह नर्सरी रेजर’ विषय पर पूर्वार्जित ज्ञान प्रमाणन (आर.पी.एल) प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ न केवल तकनीकी प्रशिक्षण का अवसर है, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का रास्ता भी खोलता है।
कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के प्रसार निदेशालय की प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी डॉ. विनिता सतपथी एवं केवीके हेड डॉ. आर.के. तिवारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर अतिथियों ने यह रेखांकित किया कि आज के बदलते समय में कौशल विकास ही रोजगार और स्वरोजगार की सबसे बड़ी कुंजी है, और नर्सरी प्रबंधन जैसे क्षेत्र कम पूंजी में स्थायी आय का सशक्त माध्यम बन सकते हैं।
डॉ. विनिता सतपथी ने अपने संबोधन में प्रशिक्षण की उपयोगिता और विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम प्रशिक्षुओं के पूर्व अनुभव को मान्यता देते हुए उनके कौशल को और निखारते हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ठोस कदम उठा सकते हैं। वहीं डॉ. आर.के. तिवारी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे इसे सीधे अपने कार्यक्षेत्र में लागू कर सकें।
प्रशिक्षण सत्र में मास्टर ट्रेनर डॉ. धीरु कुमार तिवारी द्वारा तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई, जबकि वैज्ञानिक सुमित कुमार सिंह ने विषय से जुड़ी आवश्यक और व्यावहारिक जानकारियां साझा कीं। विभिन्न प्रखंडों से आए कुल 30 प्रशिक्षुओं की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल आधारित प्रशिक्षण के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है।
कार्यक्रम के अंत में ई. विनिता कश्यप ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कुल मिलाकर, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम नर्सरी एवं बागवानी के क्षेत्र में दक्ष मानव संसाधन तैयार करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास साबित हो रहा है।