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गोपाल जी त्रिवेदी को पद्मश्री सम्मान बिहार के कृषि विज्ञान को मिली राष्ट्रीय पहचान

Ramjee Kumar Ramjee Kumar
Updated 26 January, 2026 12:08 AM IST
गोपाल जी त्रिवेदी को पद्मश्री सम्मान बिहार के कृषि विज्ञान को मिली राष्ट्रीय पहचान

केंद्र सरकार ने 77वें गणतंत्र दिवस से पूर्व घोषित Padma Awards 2026 में बिहार के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. गोपालजी त्रिवेदी को पद्मश्री सम्मान से नवाजने की घोषणा की है। उन्हें यह प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान विज्ञान एवं अभियंत्रण (Science and Engineering) के क्षेत्र में कृषि विज्ञान के लिए किए गए उनके दीर्घकालिक और प्रभावशाली योगदान के लिए दिया जाएगा।


बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस घोषणा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान बिहार की मिट्टी से जुड़े विज्ञान, शोध और नवाचार की राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर मान्यता है। किसान–वैज्ञानिक जिन्होंने खेती में वैज्ञानिक दृष्टिकोण स्थापित किया।


डॉ. गोपालजी त्रिवेदी बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले के मतलुपुर के निवासी हैं। वे पिछले कई दशकों से कृषि विज्ञान के क्षेत्र में सक्रिय हैं और विशेष रूप से लीची, मखाना तथा एकीकृत खेती प्रणालियों में उनके शोध और व्यावहारिक नवाचारों को व्यापक पहचान मिली है। उनका सबसे बड़ा योगदान यह रहा है कि उन्होंने कृषि अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से निकालकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाया, जिससे वैज्ञानिक तकनीकें वास्तविक उत्पादन और आमदनी में बदलाव का माध्यम बनीं।


कृषि में तकनीकी नवाचार और उसका प्रभाव


डॉ. त्रिवेदी ने लीची और मखाना की खेती में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसानों की उत्पादन क्षमता और आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की।


लीची बागानों में उन्होंने “री-जुवेनेशन कैनोपी मैनेजमेंट” जैसी उन्नत तकनीकों को लोकप्रिय बनाया, जिससे पुराने बागानों की उत्पादकता और फल की गुणवत्ता में सुधार हुआ। मक्का, चना, मखाना सहित अन्य फसलों में उन्होंने फसल विविधीकरण, बेहतर बीज चयन और वैज्ञानिक प्रबंधन के ज़रिये किसानों को बाज़ार-उन्मुख खेती के लिए तैयार किया। इन प्रयासों के चलते किसानों को बेहतर दाम, स्थिर उत्पादन और जोखिम में कमी का लाभ मिला।



‘विज्ञान से खेत तक : मॉडल फार्म और प्रशिक्षण


डॉ. त्रिवेदी की पहल पर कई क्षेत्रों में किसान-अनुकूल मॉडल फार्म, प्रशिक्षण कार्यक्रम और कृषि-तकनीक केंद्र विकसित किए गए। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों, जल-प्रबंधन, तालाब आधारित खेती और एकीकृत कृषि प्रणालियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिला, जिससे कृषि विज्ञान की प्रैक्टिकल उपयोगिता ज़मीनी स्तर पर स्थापित हुई।


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अकादमिक और प्रशासनिक नेतृत्व


डॉ. त्रिवेदी डॉ राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU), पूसा के कुलपति भी रह चुके हैं। जो अब केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय बन चुका है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और नीति-निर्माण को आपस में जोड़ने पर विशेष ज़ोर दिया। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे गाँवों में रहकर स्वयं खेती कर रहे हैं और मॉडल फार्मिंग, जल-एकीकृत कृषि तथा तालाब आधारित उत्पादन प्रणालियों को व्यवहार में उतारकर किसानों के लिए उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।


पद्मश्री सम्मान: क्यों और किसके लिए


पद्मश्री भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो विज्ञान एवं अभियंत्रण, कला, शिक्षा, चिकित्सा, समाज सेवा, खेल और सार्वजनिक जीवन जैसे क्षेत्रों में असाधारण एवं निरंतर योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।


वर्ष 2026 में केंद्र सरकार ने कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है, जिनमें 113 पद्मश्री, 13 पद्म भूषण और 5 पद्म विभूषण शामिल हैं। डॉ. त्रिवेदी को यह सम्मान कृषि में अत्याधुनिक तकनीकों के प्रयोग, किसानों की आमदनी बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को टिकाऊ बनाने तथा कृषि विज्ञान को नीति और ज़मीनी व्यवहार से जोड़ने के लिए दिया गया है।


प्रतिक्रियाएँ और व्यापक प्रभाव


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि यह सम्मान बिहार के किसानों और वैज्ञानिक समुदाय के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।


एग्रीकल्चर जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बिहार इकाई) के कार्यकारी सचिव राम जी कुमार ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि डॉ. त्रिवेदी की तकनीकों से किसानों को बेहतर पैदावार, उच्च गुणवत्ता और बेहतर बाज़ार मूल्य मिला है। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका योगदान कृषि शिक्षा और शोध के प्रसार में लगातार जारी है। इस उपलब्धि पर बिहार के सभी किसान पत्रकारों की ओर से उन्हें बधाई शुभकामनाएं। डॉ. त्रिवेदी का कार्य केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने कृषि-समुदाय को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे किसानों की स्थानीय, राष्ट्रीय और संभावित अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ी है।

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