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खेती-बाड़ी

बिहार में पराली प्रबंधन पर भारी सब्सिडी: कृषि यंत्रों पर मिल रही 80 प्रतिशत तक की छूट, जानें पूरी योजना

AgriPress Staff AgriPress Staff
Updated 1 April, 2026 10:03 PM IST
बिहार में पराली प्रबंधन पर भारी सब्सिडी: कृषि यंत्रों पर मिल रही 80 प्रतिशत तक की छूट, जानें पूरी योजना

बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने राज्य के किसानों से पराली न जलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष का वैज्ञानिक प्रबंधन न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है, बल्कि यह किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी है। राज्य सरकार किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद पर भारी अनुदान दे रही है ताकि वे पराली का बेहतर उपयोग कर सकें।


योजना के तहत स्ट्रॉ रीपर और स्ट्रॉ बेलर जैसे आधुनिक यंत्रों की खरीद के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्ट्रॉ रीपर मशीन कम्बाईन हार्वेस्टर से कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों को काटकर भूसा बनाने का काम करती है और बची हुई बालियों से अनाज निकालकर अतिरिक्त लाभ देती है। वहीं, स्ट्रॉ बेलर मशीन अवशेषों को इकट्ठा कर गट्ठर बनाती है, जिससे भंडारण आसान होता है और इसका उपयोग पशु चारे या औद्योगिक इकाइयों में किया जा सकता है।


सरकार ने इन यंत्रों पर श्रेणीवार अनुदान निर्धारित किया है। स्ट्रॉ रीपर के लिए सामान्य श्रेणी को 40% (अधिकतम ₹1,20,000) और अनुसूचित जाति/जनजाति को 50% (अधिकतम ₹1,50,000) का अनुदान मिलेगा। स्ट्रॉ बेलर (रेक सहित) पर सामान्य श्रेणी को 75% (अधिकतम ₹2,25,000) और अनुसूचित जाति/जनजाति को 80% (अधिकतम ₹2,50,000) की सब्सिडी दी जाएगी। स्क्वॉयर/रेक्टेंगुलर बेलर के लिए सामान्य श्रेणी को 40% (अधिकतम ₹5,28,000) और अनुसूचित जाति/जनजाति को 50% (अधिकतम ₹6,60,000) का लाभ मिलेगा।


राम कृपाल यादव ने बताया कि इच्छुक किसान इन यंत्रों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। छोटे और सीमांत किसानों तक लाभ पहुँचाने के लिए इन मशीनों को स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर में भी शामिल किया गया है। उन्होंने किसानों को आगाह किया कि पराली जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी कम होती है और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए किसान वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर अपनी आय में वृद्धि करें।