बिहार ने वर्ष 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जिसमें राज्य भर में कुल 249.21 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का उत्पादन दर्ज किया गया। यह सफलता बिहार के उप मुख्यमंत्री-सह-कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, मेहनती किसानों की लगन, आधुनिक तकनीकों के प्रयोग और राज्य सरकार द्वारा लागू की गई प्रभावी कृषि योजनाओं का प्रत्यक्ष परिणाम है।
वर्ष 2024-25 के दौरान, राज्य के 33.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की गई, जिससे कुल 99.34 लाख मीट्रिक टन उत्पादन प्राप्त हुआ। इसी प्रकार, 23.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूँ की बुवाई से 78.27 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ। मक्का की खेती ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, जहाँ 9.55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 66.03 लाख मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया। मक्का की उत्पादकता विशेष रूप से 69.13 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही, जो एक नया कीर्तिमान है और किसानों द्वारा आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का प्रमाण है।
कुल मिलाकर, 71.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में हुए इस उत्पादन के साथ, खाद्यान्न की औसत उत्पादकता 35.08 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुँच गई है, जो राज्य के कृषि क्षेत्र में बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। एक प्रगतिशील किसान ने हाल ही में कहा, "मौसम की चुनौतियों के बावजूद, नई तकनीकों और सरकारी मदद से हमारी पैदावार में लगातार वृद्धि हुई है। यह सिर्फ फसल नहीं, हमारे सुनहरे भविष्य की नींव है।"
राज्य सरकार किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसमें बीज की गुणवत्ता में सुधार, समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, फसल बीमा योजना का लाभ प्रदान करना और तकनीकी प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इन प्रयासों ने बिहार के कृषि क्षेत्र को नई ऊँचाई प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड किसानों की कड़ी मेहनत, वैज्ञानिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग और सरकार की दूरदर्शी नीतियों का परिणाम है। चावल, गेहूँ और मक्का की असाधारण पैदावार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार कृषि विकास के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है, जिसमें मक्का की रिकॉर्ड उत्पादकता राज्य को राष्ट्रीय कृषि मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाने में सहायक सिद्ध होगी।