दिल्ली की साकेत जिला अदालत ने जागरण प्रकाशन लिमिटेड द्वारा कृषि आधारित मैगजीन कृषि जागरण के खिलाफ दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन और पासिंग ऑफ का मुकदमा खारिज कर दिया है। जिला न्यायाधीश अरुल वर्मा की अदालत ने कृषि जागरण को वर्ष 1996 से संबंधित नाम का पूर्व और वैध उपयोगकर्ता माना है। अदालत ने अपने आदेश में जागरण प्रकाशन लिमिटेड को कृषि जागरण को 10 लाख रुपये बतौर जुर्माना देने का निर्देश भी दिया है।
अदालत ने कहा कि वादी द्वारा दायर यह मुकदमा एक अनावश्यक और लंबी कानूनी लड़ाई साबित हुई, जिससे प्रतिवादियों को सार्वजनिक अपमान और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही कोर्ट ने 29 सितंबर 2020 को जारी अंतरिम इंजंक्शन आदेश को भी निरस्त कर दिया है। अदालत ने माना कि पूर्व उपयोगकर्ता होने के बावजूद कृषि जागरण को इस आदेश के कारण नुकसान उठाना पड़ा।
यह कानूनी विवाद सितंबर 2019 में शुरू हुआ था, जब जागरण प्रकाशन लिमिटेड ने दावा किया था कि 'जागरण' शब्द और उससे जुड़े ट्रेडमार्क पर उसका विशेष अधिकार है। कंपनी का आरोप था कि कृषि जागरण अपने प्रिंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर 'जागरण' शब्द का इस्तेमाल कर दैनिक जागरण समूह की प्रतिष्ठा का लाभ उठा रहा है और उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा कर रहा है।
जवाब में कृषि जागरण ने अदालत को बताया कि वह सितंबर 1996 से लगातार प्रकाशित हो रही कृषि क्षेत्र की एक स्वतंत्र मासिक पत्रिका है। प्रतिवादियों ने साक्ष्य के तौर पर शुरुआती संस्करण, आरएनआई पंजीकरण और ट्रेडमार्क दस्तावेजों समेत कई सबूत पेश किए। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कृषि जागरण एक कृषि विषयक मासिक पत्रिका है, जबकि दैनिक जागरण एक सामान्य समाचार पत्र है। दोनों की प्रकृति, पाठक वर्ग और प्रकाशन शैली पूरी तरह से अलग है, इसलिए बाजार में किसी वास्तविक भ्रम की स्थिति पैदा होने का प्रमाण नहीं मिला।
कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी पूर्व उपयोगकर्ता के खिलाफ बाद में ट्रेडमार्क अधिकार के आधार पर रोक लगाने की कोशिश न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने ऐसे मुकदमों को प्रतिस्पर्धा सीमित करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाला बताया। कृषि जागरण के संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ एम.सी. डॉमिनिक ने इस फैसले को ग्रामीण पत्रकारिता और किसानों के लिए किए जा रहे कार्यों की मान्यता बताया है।