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कृषि समाचार

सहरसा कृषि कॉलेज में छात्र की मौत के बाद बवाल: एंबुलेंस की कमी पर फूटा गुस्सा, कॉलेज में तालाबंदी

AgriPress Staff AgriPress Staff
Updated 16 April, 2026 10:09 PM IST
सहरसा कृषि कॉलेज में छात्र की मौत के बाद बवाल: एंबुलेंस की कमी पर फूटा गुस्सा, कॉलेज में तालाबंदी

सहरसा के अगवानपुर स्थित मंडल भारती कृषि महाविद्यालय में गुरुवार को सैकड़ों छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तालाबंदी कर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज में एंबुलेंस की सुविधा नहीं होने के कारण उनके एक साथी रोहित कुमार को समय पर उचित इलाज नहीं मिल सका, जिससे उसकी जान चली गई। इस घटना के बाद बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर, भागलपुर से अधिकारियों की एक टीम जांच के लिए कॉलेज पहुंची।


मृतक छात्र रोहित कुमार (22 वर्ष) सिवान जिले का निवासी था। छात्र अपूर्व कुमार ने बताया कि 13 अप्रैल को रोहित सहरसा स्टेशन से ई-रिक्शा के जरिए अगवानपुर कृषि कॉलेज आ रहा था, तभी रास्ते में ई-रिक्शा पलट गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत सहरसा सदर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसकी नाजुक हालत को देखते हुए पटना रेफर कर दिया। 14 अप्रैल की सुबह पटना एम्स में इलाज के दौरान रोहित की मौत हो गई।


छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन को घटना की पूरी जानकारी दी गई थी, लेकिन छोटे से लेकर बड़े किसी भी अधिकारी ने अस्पताल जाकर घायल छात्र को देखने तक की जहमत नहीं उठाई। इस लापरवाही से नाराज छात्रों ने कॉलेज के प्राचार्य को तत्काल पद से हटाने की मांग की है। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि एंबुलेंस न होने की वजह से इलाज में देरी हुई और रोहित की जान गई।


प्रदर्शनकारी छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं: कॉलेज में एंबुलेंस की तत्काल व्यवस्था की जाए, मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी ये मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे शुक्रवार को होने वाली कॉलेज की परीक्षाओं को बाधित करेंगे।


तालाबंदी और हंगामे की सूचना मिलते ही बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर से चार सदस्यीय टीम जांच के लिए कॉलेज पहुंची। टीम की सदस्य श्वेता शांभवी ने छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को सुना और जल्द एंबुलेंस मुहैया कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों और समस्याओं से विश्वविद्यालय को अवगत कराया जाएगा और जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।