बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मत्स्य निदेशालय ने मुख्यमंत्री जलाशय मात्स्यिकी विकास योजना 2025-26 के तहत राज्य के मछली पालकों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह योजना बिहार के जलाशयों में मछली उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जिसके लिए इच्छुक किसान 31 दिसंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस पहल के माध्यम से राज्य को मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
इस योजना के तहत, सरकार जलाशय में संचयन आधारित मत्स्य प्रग्रहण और केज आधारित मत्स्य पालन तकनीक को बढ़ावा दे रही है। लाभार्थियों को प्रति यूनिट इकाई लागत की प्राक्कालित राशि का 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा, जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के मछली पालकों को 80 प्रतिशत तक का उच्च अनुदान प्राप्त होगा। शेष राशि का वहन लाभार्थी द्वारा बैंक ऋण या स्वयं के संसाधनों से किया जा सकता है।
यह योजना मुख्य रूप से दक्षिणी बिहार के उन जिलों में लागू की जाएगी जहाँ जलाशय अव्यवस्थित हैं, जिनमें बाँका, नवादा, जमुई, सासाराम, कैमूर, मुंगेर और लखीसराय जैसे जिले शामिल हैं। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में इस योजना के माध्यम से मछली पालकों को कुल 16 करोड़ 30 लाख रुपये का अनुदान वितरित किया जा चुका है, जिससे बड़ी संख्या में किसान लाभान्वित हुए हैं और राज्य में मछली उत्पादन बढ़ा है।
योजना के अंतर्गत दो प्रमुख श्रेणियों में अनुदान प्रदान किया जाता है। पहली श्रेणी मत्स्य अंगुलिका संचयन आधारित मत्स्य प्रग्रहण मात्स्यिकी की है, जिसके लिए 0.06 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की इकाई लागत पर अनुदान देय है। दूसरी श्रेणी जलाशय में केज के अधिष्ठापन से संबंधित है, जिसके लिए 3 लाख रुपये प्रति केज की इकाई लागत पर अनुदान दिया जा रहा है। मत्स्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "यह योजना छोटे और मझोले मछली पालकों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने और अपनी आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। हमारा लक्ष्य न केवल उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सृजित करना है।"
आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से वेबसाइट पर शुरू हो चुकी है। सभी इच्छुक लाभार्थी 31 दिसंबर तक आवेदन कर सकते हैं। इस योजना से संबंधित अधिक जानकारी राज्य की वेबसाइट पर या संबंधित जिला मत्स्य कार्यालय में संपर्क करके प्राप्त की जा सकती है। यह योजना बिहार के मछली पालकों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता है, जो उन्हें राज्य में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगी।