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कृषि समाचार

कृषि विभाग की पहल: 99,793 प्रतिष्ठानों के सत्यापन से सुदृढ़ हुई माप-तौल प्रणाली, जुटा ₹31.31 करोड़ राजस्व

AgriPress Staff AgriPress Staff
Updated 13 February, 2026 5:06 PM IST
कृषि विभाग की पहल: 99,793 प्रतिष्ठानों के सत्यापन से सुदृढ़ हुई माप-तौल प्रणाली, जुटा ₹31.31 करोड़ राजस्व

बिहार में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और व्यापारिक लेनदेन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग के माप-तौल संभाग द्वारा चलाए जा रहे प्रभावी अभियान ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनवरी 2026 तक, विभाग ने राज्यभर में 441 माप-तौल शिविरों का आयोजन किया, जिससे 99,793 प्रतिष्ठानों का सत्यापन और 41,999 का निरीक्षण किया गया। इस पहल से राज्य के राजस्व में ₹31.31 करोड़ का उल्लेखनीय योगदान मिला है। यह जानकारी बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने 13 फरवरी, 2026 को दी।


मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि कृषि विभाग का माप-तौल संभाग, उपभोक्ता संरक्षण और पारदर्शी व्यापार व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस पहल कर रहा है। विभाग की सक्रियता के परिणामस्वरूप पूरे राज्य में माप-तौल प्रणाली को प्रभावी ढंग से सुदृढ़ किया गया है, जिससे बाजार में विश्वसनीयता बढ़ी है।


उन्होंने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनवरी माह तक कुल 441 शिविरों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया है। इन व्यापक अभियानों के माध्यम से माप-तौल उपकरणों का बड़े पैमाने पर सत्यापन सुनिश्चित किया गया, जिससे बाजार में पारदर्शिता एवं अनुशासन स्थापित करने में मदद मिली है। इसके अतिरिक्त, इस अवधि तक कुल ₹31.31 करोड़ रुपये का राजस्व संकलन किया गया है, जो विभाग की प्रवर्तन एवं निगरानी कार्रवाई की निरंतरता को दर्शाता है।


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जनवरी 2026 माह के दौरान, राज्य के 50 विभिन्न स्थानों पर विशेष माप-तौल सत्यापन शिविरों का भी आयोजन किया गया। इन विशेष शिविरों के माध्यम से व्यापारिक प्रतिष्ठानों में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों की गहन जाँच की गई, जिसके परिणामस्वरूप ₹16.46 लाख रुपये का अतिरिक्त राजस्व संकलित हुआ। मंत्री यादव ने इस अभियान को व्यापारिक प्रतिष्ठानों में मानक एवं प्रमाणित माप-तौल उपकरणों के उपयोग को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।


श्री यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि आगामी समय में भी इन शिविरों और निरीक्षण अभियानों को और अधिक सघन किया जाए। उनका लक्ष्य है कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा, व्यापारिक गतिविधियों में पूर्ण पारदर्शिता और राज्य के राजस्व में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। यह अभियान न केवल उपभोक्ताओं को सही माप-तौल का लाभ दिला रहा है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक योगदान दे रहा है।

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