बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में आयोजित तीन दिवसीय बागवानी महोत्सव का दूसरा दिन बुधवार को किसानों, उद्यमियों और युवाओं की भारी सहभागिता के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि यह महोत्सव किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण और बागवानी आधारित कृषि की ओर प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है, जिससे उन्हें आधुनिक तकनीक, नवाचार और बाजार से जुड़ी व्यापक जानकारी मिल रही है।
कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि महोत्सव के दूसरे दिन किसानों के लिए विशेष तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के वैज्ञानिक डॉ. नीरज ने "फसल विविधिकरण: पारंपरिक खेती बनाम बागवानी फसलें" विषय पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर के वैज्ञानिकों तथा माँ एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड के विशेषज्ञों संगीता, एस.के. सिंह एवं दिलीप महाराज ने विदेशी फसलों की उत्पादन तकनीक एवं संरक्षित खेती पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया।
इन सत्रों में मखाना के प्रसंस्करण एवं विपणन पर भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार ने उपयोगी जानकारी दी, जबकि सी.आई.एम.ए.पी., लखनऊ के वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार ने औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के लाभ बताए। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के वैज्ञानिक डॉ. एम.डी. ओझा ने प्याज की वैज्ञानिक खेती पर प्रकाश डाला। इसके अतिरिक्त, "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई के लाभों पर अवनीश कुमार ने भी चर्चा की। महोत्सव में वैज्ञानिकों और उद्यान विभाग के पदाधिकारियों के साथ किसानों के संवाद सत्र, चित्रकला प्रतियोगिता, क्विज और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसने आयोजन को और अधिक जीवंत बना दिया।
कृषि मंत्री श्री यादव ने बताया कि महोत्सव स्थल पर कुल 60 सुव्यवस्थित काउंटर स्थापित किए गए हैं। इन काउंटरों पर किसानों और आगंतुकों को बागवानी क्षेत्र से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं, नवीनतम तकनीकी नवाचारों और उत्पादों की समग्र, प्रामाणिक और व्यावहारिक जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, आगंतुक इन काउंटरों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले बागवानी उत्पादों की खरीदारी भी उत्साहपूर्वक कर रहे हैं। महोत्सव के पहले दो दिनों के दौरान उद्यानिकी पौधों एवं बागवानी उत्पादों की कुल 13.5 लाख रुपये की बिक्री दर्ज की गई, जो इसकी लोकप्रियता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।
श्री यादव ने जोर देकर कहा कि इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य किसानों, उद्यमियों और युवाओं को बागवानी से जुड़ी नवीनतम तकनीकों, उन्नत पौध सामग्री तथा फल-सब्जी उत्पादन, प्रसंस्करण, संरक्षण और विपणन की आधुनिक प्रणालियों से अवगत कराना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह महोत्सव बागवानी क्षेत्र में ज्ञान, नवाचार और नए अवसरों को सुदृढ़ करने का एक प्रभावी मंच सिद्ध होगा, जिससे बिहार आय वृद्धि, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से अग्रसर होगा।
महोत्सव में सब्जी, मशरूम, फल, फल संरक्षण उत्पाद, शहद, पान के पत्ते, शोभाकार एवं पत्तीदार पौधे, बोनसाई, जाड़े के मौसमी फूल, कैक्टस एवं सक्युलेंट, विभिन्न किस्मों के पाम, कटे फूल, कलात्मक पुष्प सज्जा तथा औषधीय एवं सुगंधित पौधों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई है। मंत्री ने सभी से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस महोत्सव में भाग लें और बागवानी के माध्यम से समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ें, क्योंकि इन प्रयासों से बागवानी को रोजगार एवं स्वरोजगार का प्रभावी साधन बनाया जा रहा है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए भी आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।