देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के महत्वाकांक्षी 'राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' का आज मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) से भव्य शुभारंभ हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने राज्य के लिए एक विशेष दलहन पैकेज की पुरजोर मांग करते हुए अगले पाँच वर्षों में बिहार को दलहन उत्पादन में पूर्णतः आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प दोहराया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम ने देश की दलहन नीति को एक नई दिशा दी है।
मंत्री श्री यादव ने बताया कि राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्र-स्तरीय परामर्श कार्यक्रम के अवसर पर सीहोर स्थित शुष्क क्षेत्रों में कृषि अनुसंधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (ICARDA) परिसर में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान तथा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा प्रशासनिक भवन, किसान प्रशिक्षण केंद्र एवं अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का विधिवत उद्घाटन किया गया।
बिहार की विशिष्ट कृषि परिस्थितियों को रेखांकित करते हुए, कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने केंद्र सरकार से विशेष सहयोग एवं ठोस नीति समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बिहार को वर्षा-आधारित खेती वाला राज्य मानते हुए, राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत राज्य की भौगोलिक, जलवायु एवं कृषि संरचना के अनुकूल एक विशेष दलहन पैकेज स्वीकृत किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अरहर, चना, मसूर, उड़द एवं मूंग को बिहार की राज्य-विशेष दलहन फसलों के रूप में चिन्हित करने का भी अनुरोध किया।
राज्य में दलहन उत्पादन को सुदृढ़ करने के लिए, मंत्री ने राष्ट्रीय स्तर के सीड हब की स्थापना तथा 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता से उच्च उत्पादक, अल्प अवधि एवं रोग-रोधी बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाने पर जोर दिया। उन्होंने क्लस्टर आधारित खेती मॉडल को बढ़ावा देने की वकालत करते हुए कहा कि बिहार में ब्लॉक एवं क्लस्टर आधारित कार्यक्रमों को विशेष रूप से लागू किया जाए, जिसमें प्रति क्लस्टर सिंचाई, बीज, कृषि यंत्र एवं प्रशिक्षण का समेकित पैकेज उपलब्ध हो। सूक्ष्म सिंचाई एवं जल संरक्षण को प्रोत्साहित करते हुए, दलहन क्षेत्रों में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर पर 90 प्रतिशत तक केंद्रीय अनुदान तथा वर्षा-आधारित क्षेत्रों में फार्म पोंड एवं जल संचयन को मिशन से जोड़ने का भी प्रस्ताव रखा गया।
श्री यादव ने दलहन बुवाई, कटाई एवं थ्रेसिंग हेतु विशेष कृषि यंत्रों पर अतिरिक्त केंद्रीय सहायता देने, कस्टम हायरिंग सेंटर को दलहन मिशन से जोड़ने तथा दलहनी फसलों की एमएसपी पर प्रभावी एवं सुनिश्चित खरीद व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके लिए नाफेड एवं एफसीआई के माध्यम से स्थायी खरीद केंद्रों की स्थापना का भी अनुरोध किया गया। उन्होंने बिहार में दलहन प्रसंस्करण एवं वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने के लिए दाल मिल, प्रोसेसिंग एवं पैकेजिंग इकाइयों हेतु विशेष पूंजी अनुदान का प्रावधान करने तथा कृषक उत्पादक संगठन (FPO) आधारित प्रोसेसिंग मॉडल को प्रोत्साहित करने की बात कही। कृषि विज्ञान केंद्रों को दलहन अनुसंधान हेतु विशेष परियोजना अनुदान, किसानों के लिए फील्ड डेमो, मॉडल प्लॉट एवं डिजिटल एडवाइजरी की व्यवस्था भी आवश्यक बताई गई।
प्राकृतिक आपदाओं से बार-बार प्रभावित होने वाले बिहार के संदर्भ में, मंत्री ने दलहन फसलों के लिए कम प्रीमियम पर व्यापक फसल बीमा एवं मौसम आधारित क्षति पर त्वरित क्षतिपूर्ति की व्यवस्था की मांग की। केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने के लिए बिहार हेतु केंद्रीय-राज्य संयुक्त दलहन टास्क फोर्स के गठन का भी प्रस्ताव रखा गया।
श्री यादव ने दलहन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, "दलहन केवल दाल नहीं, बल्कि गरीब की थाली का प्रमुख प्रोटीन, बच्चों के स्वास्थ्य की नींव, माताओं के पोषण का आधार और मिट्टी की उर्वरता का प्राकृतिक रक्षक है। यह नाइट्रोजन प्रदान कर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाती है और जलवायु परिवर्तन के दौर में पर्यावरण-अनुकूल खेती का सशक्त समाधान प्रस्तुत करती है।" उन्होंने बताया कि बिहार एक कृषि-प्रधान राज्य है, जहाँ अधिकांश किसान छोटे एवं सीमांत हैं। वर्ष 2024-25 में राज्य में 4.48 लाख हेक्टेयर में दलहन की खेती से 3.93 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ, फिर भी मांग की पूर्ति हेतु बाहरी निर्भरता बनी हुई है।
मंत्री श्री यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि इन समन्वित प्रयासों से अगले पांच वर्षों में बिहार दलहन के क्षेत्र में पूर्णतः आत्मनिर्भर बन जाएगा, जिससे न केवल किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी बल्कि राज्य की पोषण सुरक्षा भी सुदृढ़ होगी। यह मिशन बिहार के कृषि परिदृश्य में एक नई क्रांति का सूत्रपात करेगा।