कृषि जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बिहार ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। आपको बता दें कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर (BAU) द्वारा विकसित एक महत्वपूर्ण नवाचार को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा पेटेंट प्रदान किया गया है। यह पेटेंट न केवल बिहार, बल्कि देश के कृषि अनुसंधान और नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
माननीय कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित “A Growth Media Composition for Rapid in-vitro Direct Organogenesis of Saffron” शीर्षक वाले नवाचार का पेटेंट 09 जनवरी 2026 को मिला है। उन्होंने इस गौरवपूर्ण अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं तकनीकी कर्मियों को हार्दिक बधाई दी।
मंत्री ने कहा कि यह पेटेंट विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक दक्षता और निरंतर अनुसंधान प्रयासों का सशक्त प्रमाण है। केसर जैसी अत्यंत मूल्यवान फसल के लिए विकसित यह उन्नत इन-विट्रो तकनीक भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने, कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने तथा राज्य की कृषि को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होगी।
गौरतलब है कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत एवं मेक इन इंडिया के संकल्प तथा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के किसान समृद्धि और सतत विकास के विजन के अनुरूप है। जैव-प्रौद्योगिकी आधारित उन्नत तकनीकों के माध्यम से उच्च मूल्य वाली फसलों का उत्पादन बढ़ाकर ग्रामीण रोजगार सृजन को गति मिलेगी।
राम कृपाल यादव ने बताया कि केसर विश्व की सबसे महंगी मसालों में से एक है, जिसकी खेती अभी तक सीमित भौगोलिक क्षेत्रों तक केंद्रित रही है। विशेष रूप से, विश्वविद्यालय द्वारा विकसित यह पेटेंटेड ग्रोथ मीडिया कंपोजिशन केसर के तीव्र, प्रत्यक्ष एवं नियंत्रित इन-विट्रो प्रवर्धन को संभव बनाती है। इससे कम समय में बड़ी संख्या में गुणवत्तापूर्ण, रोगमुक्त और समान विशेषताओं वाले पौधे तैयार किए जा सकते हैं।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि पारंपरिक खुले खेतों में बिहार की जलवायु में केसर की खेती चुनौतीपूर्ण हो सकती है, किंतु नियंत्रित तापमान, नमी एवं संरक्षित वातावरण (पॉलीहाउस, नेट हाउस) में इसकी खेती पूरी तरह संभव है। इन-विट्रो तकनीक से प्राप्त स्वस्थ रोपण सामग्री का उपयोग आधुनिक उद्यानिकी प्रणालियों में किया जा सकेगा। इससे प्रगतिशील किसान, किसान उत्पादक संगठन (FPO), उद्यमी और स्टार्टअप केसर उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
कृषि मंत्री ने कहा कि यह तकनीक केसर के बीज कंद की कमी की समस्या को दूर करेगी तथा किसानों की उत्पादन लागत घटाकर लाभ में वृद्धि करेगी। इसके व्यावसायीकरण से केसर आधारित प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार जल्द ही विश्वविद्यालय के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रदर्शन इकाइयाँ एवं किसान जागरूकता अभियान संचालित करेगी, जो देश की कृषि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेगी।