बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के अंतर्गत संचालित प्रतिष्ठित बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर में आज एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ, जब डॉ. रूबी रानी ने सह अधिष्ठाता सह प्राचार्य के पद का विधिवत पदभार ग्रहण किया। इस अवसर के साथ ही डॉ. रूबी रानी देश के सबसे पुराने कृषि महाविद्यालयों में से एक, बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर की पहली महिला प्राचार्य बन गई हैं।
वर्ष 1905 में स्थापित बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर का भारतीय कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान रहा है। ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान की कमान पहली बार किसी महिला शिक्षाविद् को सौंपा जाना न केवल विश्वविद्यालय के लिए, बल्कि राज्य और देश की कृषि शिक्षा व्यवस्था के लिए भी एक प्रेरणादायी उपलब्धि मानी जा रही है।
डॉ. रूबी रानी एक अनुभवी शिक्षाविद्, कुशल प्रशासक और समर्पित कृषि वैज्ञानिक हैं। उन्हें कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं विस्तार के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव प्राप्त है। अपने शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्र कल्याण, नवाचार आधारित अनुसंधान तथा किसानों के हित में तकनीकी प्रसार को विशेष प्राथमिकता दी है।
पदभार ग्रहण के अवसर पर डॉ. रूबी रानी ने कहा कि बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर की समृद्ध परंपरा और गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक, रोजगारोन्मुखी एवं नवाचार आधारित शिक्षा प्रदान करना, अनुसंधान को किसानों की समस्याओं से जोड़ना तथा संस्थान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाना उनका लक्ष्य है।
उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि यह जिम्मेदारी उन्हें विशेष ऊर्जा और दायित्वबोध के साथ कार्य करने की प्रेरणा देती है। डॉ. रूबी रानी ने आशा व्यक्त की कि उनका यह कार्यकाल छात्राओं सहित सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा।
इस अवसर पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, शिक्षक-कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने डॉ. रूबी रानी को शुभकामनाएं दीं और उनके नेतृत्व में महाविद्यालय के शैक्षणिक, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों के और अधिक सुदृढ़ होने की अपेक्षा जताई।
डॉ. रूबी रानी का प्राचार्य पद पर पदभार ग्रहण करना न केवल बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है, बल्कि कृषि शिक्षा में महिला नेतृत्व की बढ़ती भूमिका का भी सशक्त प्रतीक है।