डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा में जनवरी माह में सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों के सम्मान में एक भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया। विदित हो कि विश्वविद्यालय के विभिन्न सेवा संवर्गों में कार्यरत कुल बीस कर्मचारी इस माह एकसाथ सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
इस अवसर पर समारोह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारी केवल सेवा से मुक्त होते हैं, विश्वविद्यालय परिवार से नहीं। वे आगे भी विश्वविद्यालय के अभिन्न सदस्य बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि आज विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो पहचान बनी है, उसमें इन कर्मचारियों के अथक परिश्रम और समर्पण की अहम भूमिका रही है।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय ने प्लेसमेंट, पेटेंट, डिजिटल एग्रीकल्चर और ‘दीक्षा’ जैसे नवाचारों के क्षेत्र में विशिष्ट कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिसकी चर्चा हर ओर हो रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सेवालाभ प्राप्त करने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन उनके कार्यभार संभालने के बाद से सेवानिवृत्ति के दिन ही सभी सेवालाभ देने की व्यवस्था लागू की गई, जो आज भी सफलतापूर्वक जारी है।
डॉ. पांडेय ने विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को निर्देश दिया कि वे सेवानिवृत्त कर्मियों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें और उनके सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाएं। उन्होंने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के परिवारजनों से भी संवाद किया और सभी के स्वस्थ, संतुष्ट एवं सम्मानपूर्ण जीवन की कामना की।
कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. पी. के. प्रणव ने कहा कि कुलपति डॉ. पांडेय सेवानिवृत्त कर्मचारियों को विशेष महत्व देते हैं, क्योंकि इन्हीं लोगों द्वारा रखी गई मजबूत नींव पर आज विश्वविद्यालय प्रगति के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने सेवानिवृत्त कर्मियों से आग्रह किया कि वे भविष्य में भी विश्वविद्यालय से जुड़े रहें और विकास कार्यों के लिए अपने सुझाव देते रहें।
विश्वविद्यालय के नियंत्रक डॉ. पी. के. झा ने भी सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके योगदान की सराहना की।
समारोह में निदेशक अनुसंधान डॉ. ए. के. सिंह, निदेशक गन्ना अनुसंधान डॉ. देवेंद्र सिंह, डीन टीसीए डॉ. पी. पी. सिंह, डीन फिशरीज डॉ. पी. पी. श्रीवास्तव, डॉ. शिवपूजन सिंह, डॉ. रितंभरा सिंह, डॉ. कुमार राज्यवर्धन सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, वैज्ञानिक एवं विश्वविद्यालय के पदाधिकारी उपस्थित रहे।