पटना उच्च न्यायालय ने 23 सितंबर, 2025 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU) में सहायक नियंत्रक पद की नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विश्वविद्यालय से चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस अजित कुमार की एकल पीठ ने सिविल रिट क्षेत्राधिकार केस संख्या 15927 ऑफ 2025 में यह मौखिक आदेश सुनाया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि विज्ञापन संख्या RPCAU/01/2024 के तहत की गई कोई भी कार्रवाई इस मामले के अंतिम परिणाम के अधीन होगी।
याचिकाकर्ता अनीमेश कुमार के वकील मृत्युंजय कुमार ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने सहायक नियंत्रक पद के लिए लिखित परीक्षा दी थी, लेकिन उन्हें मनमाने और अवैध तरीके से असफल घोषित कर दिया गया। वकील ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई DRPCAU अधिनियम, 2016 का स्पष्ट उल्लंघन है और उन्हें इंटरव्यू में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। याचिकाकर्ता का दावा है कि परिणामों की घोषणा के संबंध में विश्वविद्यालय द्वारा कोई सार्वजनिक नोटिस या संचार नहीं किया गया, और आरोप लगाया कि 'खास' व्यक्तियों को समायोजित करने के लिए प्रक्रियाओं का दुर्भावनापूर्ण उल्लंघन किया गया।
विश्वविद्यालय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित श्रीवास्तव ने इन आरोपों का खंडन किया। उन्होंने न्यायालय को अवगत कराया कि याचिका में कई कमियां हैं, क्योंकि याचिकाकर्ता ने यह खुलासा नहीं किया कि उसने सहायक रजिस्ट्रार और सहायक नियंत्रक दोनों विज्ञापित पदों के लिए आवेदन किया और दोनों परीक्षाओं में भाग लिया। श्रीवास्तव ने दलील दी कि चूंकि याचिकाकर्ता लिखित परीक्षा में सफल घोषित नहीं हुआ, इसलिए उसकी उम्मीदवारी पर विचार नहीं किया गया और उसे इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञापन 24.07.2025 के पूर्व नोटिस की निरंतरता में था, जिसे याचिकाकर्ता ने संलग्न नहीं किया है और तथ्यात्मक व कानूनी स्थिति को स्पष्ट करने के लिए समय मांगा।
न्यायालय ने मामले में विवादित तथ्य होने के कारण, विश्वविद्यालय को 04 नवंबर, 2025 तक एक उपयुक्त जवाब और सहायक सामग्री के साथ पेश होने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता के वकील द्वारा चयन की पूरी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग के बावजूद, न्यायालय ने विश्वविद्यालय को जवाब दाखिल करने का समय दिया, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि विज्ञापन के तहत कोई भी कार्रवाई इस केस के अंतिम परिणाम के अधीन होगी। 'भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना किसी भी शैक्षिक संस्थान के लिए आधारशिला होती है,' ऐसे में न्यायालय का यह निर्देश नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस आदेश के साथ, पटना उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक स्पष्ट संदेश दिया है। अब सभी की निगाहें 04 नवंबर, 2025 को विश्वविद्यालय द्वारा दायर किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं, जिससे इस मामले की आगामी दिशा तय होगी।