बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में कुलपति और प्रशासनिक स्तर पर हुए गंभीर अनियमितताओं और नियुक्ति घोटाले को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस संबंध में सांसद सुधाकर सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विश्वविद्यालय प्रशासन पर भारी वित्तीय गड़बड़ी और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं।
सांसद सुधाकर सिंह ने कुलपति डॉ. दुनियां राम सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्होंने संस्था के नियमों की अनदेखी करते हुए अपने पुत्र और करीबी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए मनमानी नियुक्तियां कीं और बड़े पैमाने पर पैसों का गबन किया।
मुख्य आरोप
- वैज्ञानिकों की नियुक्ति में गड़बड़ी: विश्वविद्यालय में लगभग 300 वैज्ञानिकों की नियुक्ति बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए की गई। बाहरी छात्रों को लाभ पहुंचाने के नाम पर भारी-भरकम शुल्क लेकर पदों को भरा गया।
- BOM बैठकों का दुरुपयोग: विश्वविद्यालय की रोक के बावजूद बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (BOM) की बैठकें बुलाकर वाईटिंग हाउस में नियुक्तियां की गईं।
- पेटेंट विवाद: तत्कालीन और वर्तमान कुलपति ने अपने बल पर 15 से अधिक पेटेंट अपने नाम दर्ज कराए, जिनका कोई वैज्ञानिक या शैक्षणिक लाभ विश्वविद्यालय या छात्रों को नहीं मिल सका।
- पिछले रिकॉर्ड पर सवाल: डॉ. दुनियां राम सिंह पूर्व में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर में SIT जांच में दोषी पाए जा चुके हैं।
- प्रशासनिक पदों पर मनमानी: कृषि से जुड़े पदों की नियुक्ति में नियमों की अनदेखी कर अपने समर्थकों को नौकरी दी गई।
- वित्तीय घोटाला: मानव बल आपूर्ति कंपनी के माध्यम से बड़ी रकम के गबन का आरोप है। इसमें कुलपति के पुत्र की कंपनी को अनुबंध दिए जाने की बात सामने आई है।
कार्रवाई की मांग
सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार सरकार, शिक्षा विभाग और केंद्र सरकार से इन सभी मामलों की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और कृषि क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखने के लिए इस मामले में तत्काल कदम उठाना जरूरी है।
यह पूरा मामला न केवल शैक्षणिक जगत बल्कि कृषि अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है।