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सरकारी योजनाएं

किसानों की आय और स्वास्थ्य सुरक्षा हेतु पौधा संरक्षण परामर्श योजना

AgriPress Staff AgriPress Staff
Updated 13 September, 2025 10:28 PM IST
किसानों की आय और स्वास्थ्य सुरक्षा हेतु पौधा संरक्षण परामर्श योजना

बिहार के उप मुख्यमंत्री-सह-कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने घोषणा की कि राज्य सरकार किसानों की फसलों को कीट-व्याधियों और खरपतवार से होने वाली क्षति से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण 'पौधा संरक्षण परामर्श योजना' चला रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कीट-व्याधि और अन्य जैविक कारकों के कारण प्रतिवर्ष होने वाले 30 से 35 प्रतिशत तक के फसल नुकसान को कम करना और किसानों को सुरक्षित कृषि पद्धतियों से जोड़ना है। यह योजना राज्य के सभी जिलों में लागू की जा रही है।


इस योजना के तहत, राज्य के प्रत्येक जिले में कीटनाशी प्रतिष्ठानों के 25-25 विक्रेताओं को साल में दो बार प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में विक्रेताओं को कीटनाशकों के सुरक्षित भंडारण, उनके प्रभाव, वैकल्पिक उपायों और संभावित दुष्प्रभावों सहित नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की जा रही है। यह प्रशिक्षण सुनिश्चित करेगा कि विक्रेता किसानों तक विवेकपूर्ण और वैज्ञानिक कीटनाशी उपयोग की सही जानकारी पहुंचा सकें।


भारत सरकार के वनस्पति संग्रहण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय द्वारा समय-समय पर जारी कीटनाशकों की सूची के अनुसार, अब तक 49 कीटनाशकों के निर्माण, आयात और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इनमें प्रमुख रूप से कार्बारिल, डाईक्लोरोभॉस, फेनथियॉन, फॉसफॉमिडॉन और फोरेट शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 16 कीटनाशकों पर आंशिक प्रतिबंध लगाया गया है, जिनमें एल्युमिनियम फॉसफाईड, कार्बाेफयूरॉन, क्लोरपाईरीफॉस, डाईमेथोएट, मालाथियान और मोनोक्रोटोफॉस जैसे रसायन हैं। इन आंशिक प्रतिबंधित कीटनाशकों का उपयोग कुछ विशेष फसलों पर पूरी तरह निषिद्ध है, जैसे कि क्लोरपाईरीफॉस का बेर, नींबू और तंबाकू पर तथा डाईमेथोएट का कच्चे सेवन योग्य फल और सब्जियों पर।


शारदीय (खरीफ) मौसम में कीटनाशी विक्रेताओं का प्रशिक्षण कार्यक्रम सक्रिय रूप से चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम में प्रतिबंधित कीटनाशकों के संबंध में किसानों को जागरूक करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि वे केवल अनुशंसित एवं सुरक्षित रसायनों का ही प्रयोग करें। इसका सीधा लाभ किसानों की फसल की रक्षा, पर्यावरण का संरक्षण और किसानों व उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मिलेगा।


यह परामर्श योजना किसानों को सही कीटनाशकों के चयन और सुरक्षित उपयोग के बारे में सशक्त कर रही है, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ मिलने के साथ-साथ एक स्वस्थ कृषि वातावरण भी मिलेगा।

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