ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर सशक्त बनाने की दिशा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU), पूसा ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
गौरतलब है कि विश्वविद्यालय के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय द्वारा आज 27 जनवरी 2026 को समस्तीपुर जिले के खानपुर प्रखंड स्थित मिल्की गांव के मखाना फॉर्म पर 'कृषक महिलाओं की आजीविका उन्नयन हेतु समौजीकरण सह जागरूकता' विषय पर एक भव्य कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में 400 से अधिक ग्रामीण महिलाओं ने भाग लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना था।
न्यूनतम भूमि पर भी आय सृजन संभव: डॉ. पी.एस. पांडेय
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय ने अपने संबोधन में 'नारी शक्ति' को समाज में विशिष्ट परिवर्तन का आधार बताया। उन्होंने उपस्थित महिलाओं को आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय आय सृजन में तकनीकी रूप से हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। कुलपति ने जोर देकर यह बात रेखांकित की, “न्यूनतम खेत या भूमि वाली महिलाएं भी मशरूम तथा इसके विभिन्न उत्पादों द्वारा अच्छी आय सृजन कर सकती हैं। विश्वविद्यालय इनके उत्पादों के विपणन (Marketing) में भी पूरा सहयोग देगा।”
ड्रोन पायलट बनेंगी गांव की बेटियां; खुलेगा कस्टम हायरिंग सेंटर
इस अवसर पर, महिला सशक्तिकरण की दिशा में दो बड़ी ऐतिहासिक घोषणाएं की गईं। कुलपति डॉ. पांडेय ने मिल्की गांव की 2 महिलाओं को विश्वविद्यालय द्वारा दिए जाने वाले अत्यंत आधुनिक 'ड्रोन पायलट' प्रशिक्षण के लिए नि:शुल्क आमंत्रित किया।
इसके अलावा, कृषि में महिलाओं द्वारा उपयोग होने वाले यंत्रों की जानकारी और उनके सुलभ उपयोग के लिए गांव में एक 'कस्टम हायरिंग सेंटर' (Custom Hiring Centre) की स्थापना की घोषणा भी की गई। यह सेंटर महिलाओं को महंगे कृषि यंत्र किराए पर उपलब्ध कराकर खेती को आसान बनाएगा।
मशरूम उत्पादन बना मुख्य आकर्षण
कार्यशाला का एक मुख्य आकर्षण मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण रहा, जिसमें मशरूम कंसल्टेंट डॉ. दयाराम ने कम लागत में अधिक मुनाफे की बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार मशरूम के साथ-साथ उसके अन्य मूल्य वर्धित उत्पादों (Value Added Products) से भी आय सृजन किया जा सकता है। महिलाओं को व्यावहारिक ज्ञान देने हेतु डॉ. आर.पी. प्रसाद और डॉ. दयाराम के नेतृत्व में मशरूम उत्पादन का फ्रंट लाइन डेमोन्स्ट्रेशन (Front Line Demonstration) भी किया गया। मौके पर ही महिलाओं के बीच मशरूम स्पॉन (Mushroom Spawn) का वितरण किया गया ताकि वे तुरंत उत्पादन शुरू कर सकें।सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. उषा सिंह ने अपने स्वागत भाषण में कृषक महिलाओं को आजीविका के नए अवसरों के प्रति जागरूक करने को अपनी प्राथमिकता बताया। मुख्य अन्वेषक डॉ. संगीता देव ने महिलाओं को कृषि से उद्यमिता (Entrepreneurship) की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विनीता सत्पथी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. गीतांजलि चौधरी द्वारा किया गया।