बिहार के किसानों के लिए आय, रोजगार और पोषण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य योजना मद से "मधुमक्खी पालन एवं मधु उत्पादन योजना" शुरू की गई है। यह योजना मधु क्रांति को बढ़ावा देने और घर-घर रोजगार सृजित करने के लक्ष्य पर केंद्रित है।
मधुमक्खी पालन कम लागत, कम जगह और कम समय में शुरू होने वाली एक प्रभावी गतिविधि है, जो परिवार की नियमित अतिरिक्त आय का साधन बन सकती है। किसान शहद और मोम आदि की बिक्री से कमाई कर सकते हैं। इसके साथ ही, प्राकृतिक परागण के कारण फल, सब्जी और तिलहनी फसलों की उपज व गुणवत्ता में सुधार होता है। यह घर-आधारित या समूह-आधारित काम महिलाओं, ग्रामीण युवाओं, सीमांत व भूमिहीन परिवारों के लिए रोजगार सृजन का व्यापक अवसर प्रदान करता है।
योजना में सहायता
निर्धारित मानकों के अनुसार, मधुमक्खी पालन से जुड़ी आवश्यक सामग्री और उपकरणों पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। सहायता प्राप्त सामग्री में मधुमक्खी कॉलोनी, पालन की शुरुआत के लिए आवश्यक मधुमक्खी छत्ता (हाइव/बॉक्स), शहद निष्कर्षण उपकरण (हनी एक्सट्रैक्टर), और फूड-ग्रेड कंटेनर शामिल हैं। इन उपकरणों का उपयोग वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन, स्वच्छ निष्कर्षण, सुरक्षित भंडारण और गुणवत्ता संरक्षण में वृद्धि के लिए आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन, गुणवत्ता नियंत्रण, मानकीकरण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन एवं मधु परीक्षण से जुड़ी सेवाएँ सुदृढ़ की जा रही हैं।
कृषि मंत्री का संदेश
कृषि मंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि मधुमक्खी पालन खेती का सशक्त साथी है, जो शहद से कमाई और परागण से फसल की उपज व गुणवत्ता में बढ़ोतरी करता है। उन्होंने बताया कि 'मधुमक्खी पालन एवं मधु उत्पादन योजना' के जरिए छोटे, सीमांत, भूमिहीन परिवारों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को कम लागत में रोजगार और अतिरिक्त आय का भरोसा दिया जा रहा है। कृषि मंत्री ने सभी किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों से आग्रह किया है कि वे अपने जिला उद्यान कार्यालय से संपर्क कर योजना का लाभ उठाएँ और बिहार की 'मधु क्रांति' का हिस्सा बनें।