आपको बता दें कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन से जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दिनांक 13 जनवरी, 2026 को बामेती, पटना द्वारा प्रायोजित एक दिवसीय सहभागी बीज उत्पादन कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में बिहार के छह प्रमुख जिलों—गया, पटना, वैशाली, नालंदा, भोजपुर एवं जहानाबाद से आए किसानों और प्रसार कर्मियों सहित कुल 24 प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं सामूहिक गायन से हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कृषि में गुणवत्तापूर्ण बीज की आवश्यकता पर निर्णायक रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि सहभागी बीज उत्पादन बीज प्रणाली को सुदृढ़ करने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। निदेशक डॉ. दास ने किसानों से आह्वान किया कि वे संस्थान के तकनीकी सहयोग का लाभ उठाते हुए बीज उत्पादन कार्य को प्राथमिकता दें।
इससे पूर्व, कार्यक्रम के आयोजन सचिव एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संतोष कुमार ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और कार्यशाला के विस्तृत उद्देश्यों पर जानकारी दी। उन्होंने सहभागी दृष्टिकोण को अपनाते हुए बीज उत्पादन के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यशाला के दौरान विभिन्न प्रभागाध्यक्षों ने भी अपना तकनीकी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। डॉ. आशुतोष उपाध्याय, प्रभागाध्यक्ष, भूमि एवं जल प्रबंधन ने सहभागी बीज उत्पादन की सफलता के लिए प्रभावी भूमि एवं जल प्रबंधन को आवश्यक बताया। वहीं, डॉ. संजीव कुमार, प्रभागाध्यक्ष, फसल अनुसंधान ने “आत्मनिर्भर किसान” की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि सतत कृषि और उत्पादकता में वृद्धि के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज अनिवार्य हैं।
विशेष रूप से, डॉ. उज्ज्वल कुमार, प्रभागाध्यक्ष, सामाजिक-आर्थिक एवं प्रसार ने किसानों के बीच बीज विपणन और प्रभावी वितरण प्रणाली के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज की समय पर उपलब्धता किसानों द्वारा उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कार्यशाला का समापन किसानों और वैज्ञानिकों के बीच परस्पर संवादात्मक चर्चा एवं प्रक्षेत्र भ्रमण के साथ हुआ। गौरतलब है कि इस भ्रमण ने प्रतिभागियों की सहभागी बीज उत्पादन प्रक्रिया तथा कृषि विकास में इसकी भूमिका के प्रति समझ को और अधिक सुदृढ़ किया।