बिहार सरकार राज्य में टिकाऊ और दीर्घकालीन कृषि प्रणाली को सुदृढ़ करने तथा किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जैविक खेती को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में, बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने आज घोषणा की कि बिहार राज्य जैविक मिशन के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण योजनाओं का प्रभावी संचालन किया जा रहा है, जिनका लक्ष्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर जैविक विकल्पों को बढ़ावा देना है।
मंत्री श्री यादव ने कहा कि इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य राज्य में सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देना, जैविक खेती के प्रति किसानों को प्रोत्साहित करना तथा जैव एवं कार्बनिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ाना है। उन्होंने जोर दिया कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने से मिट्टी के स्वास्थ्य एवं उर्वरा शक्ति का संरक्षण होगा, साथ ही मानव जीवन, पशु-पक्षियों एवं पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। जैविक खेती अपनाने से फसल लागत में कमी आएगी और उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि होगी, जिससे किसानों की आय में सकारात्मक वृद्धि होगी।
सरकार की प्रमुख योजनाओं में 'पक्का वर्मी कम्पोस्ट पीट इकाई योजना' शामिल है, जिसके तहत प्रत्येक लाभार्थी को अधिकतम तीन इकाइयों का लाभ प्रदान किया जाता है। प्रति पीट की कुल लागत 10 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिस पर 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 5 हजार रुपये (दोनों में से जो कम हो) का अनुदान दिया जाता है।
इसी प्रकार, 'गोबर/बायो गैस इकाई योजना' के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को एक इकाई का लाभ दिया जाता है। इस इकाई की कुल लागत 42 हजार रुपये है, जिस पर 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 21 हजार रुपये (दोनों में से जो कम हो) का अनुदान प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त, लाभार्थियों को 1,500 रुपये की टर्न-की सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।
व्यावसायिक स्तर पर जैविक खाद उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए 'व्यावसायिक वर्मी कम्पोस्ट इकाई योजना' भी चलाई जा रही है। 1 हजार, 2 हजार और 3 हजार मेगाटन क्षमता वाली इकाइयों के लिए क्रमशः 16 लाख रुपये, 32 लाख रुपये और 50 लाख रुपये की लागत निर्धारित है। इन पर 40 प्रतिशत अथवा अधिकतम क्रमशः 6.40 लाख रुपये, 12.80 लाख रुपये और 20 लाख रुपये (दोनों में से जो कम हो) का भारी अनुदान प्रदान किया जाता है।
मंत्री श्री यादव ने यह भी बताया कि इन सभी योजनाओं के तहत ऑनलाइन डीबीटी पोर्टल के माध्यम से प्राप्त आवेदनों को 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर स्वीकृति प्रदान की जाती है, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और लाभार्थियों तक त्वरित लाभ सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बिहार के किसानों से अपील की कि वे इन आकर्षक योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाकर न केवल पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि सुनिश्चित करें, बल्कि अपनी आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी करें।
बिहार सरकार जैविक खेती को वास्तव में एक जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे राज्य में कृषि क्षेत्र का सतत विकास हो सके और किसानों का जीवन समृद्ध बन सके।