कृषि मंत्री की अध्यक्षता में बागवानी निदेशालय द्वारा राज्य में बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए संचालित योजनाओं और नई पहलों की विस्तृत समीक्षा की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण रोजगार सृजन और कृषि आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहित करना था। बैठक के दौरान बिहार को बागवानी आधारित समृद्ध अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करने के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
मखाना क्षेत्र के विकास के लिए राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के माध्यम से उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात को बढ़ावा देने की कार्ययोजना की समीक्षा की गई। किसानों, स्वयं सहायता समूहों और एफपीओ को लाभ पहुंचाने के लिए मखाना प्रसंस्करण अवसंरचना के विकास और अनुदानित पॉपिंग मशीनों के वितरण पर विशेष जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त, आईआईटी खड़गपुर के सहयोग से स्मार्ट संग्रहण और हार्वेस्टिंग यंत्रों के विकास के लिए किए गए एमओयू पर त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया गया।
राज्य में शहद उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 'मधु-क्रांति' पहल पर भी चर्चा की गई। इसके तहत वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण और ब्रांडिंग तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ महिला समूहों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध कराने के लिए 'बिहार बागवानी नर्सरी (विनियमन) अधिनियम, 2026' के प्रभावी क्रियान्वयन और नर्सरियों के डिजिटल अनुश्रवण पर विचार-विमर्श हुआ। साथ ही, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मोड पर उच्च गुणवत्ता वाले सब्जी बीज उत्पादन की व्यवस्था विकसित करने की योजना बनाई गई।
भंडारण की समस्या को दूर करने के लिए 'बिहार कोल्ड चेन निवेश प्रोत्साहन नीति, 2026' के तहत सभी प्रखंडों में विकेंद्रीकृत सौर आधारित कोल्ड स्टोरेज के निर्माण को प्रोत्साहित करने पर चर्चा हुई। इससे फसलों के नुकसान में कमी आएगी और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। बैठक में 'दीघा मालदह' आम के संरक्षण हेतु 'विरासत से समृद्धि मिशन', कृषि स्टार्टअप को बढ़ावा देने और योजनाओं में पारदर्शिता के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों के समावेश पर भी विस्तार से बात की गई। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को सभी योजनाओं को समयबद्ध और प्रभावी तरीके से लागू करने का निर्देश दिया।