बिहार सरकार की 'छत पर बागवानी योजना' शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों और पोषण सुरक्षा की आवश्यकता का एक अभिनव समाधान बनकर उभरी है। कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने हाल ही में इस योजना को एक दूरदर्शी एवं जनहितकारी पहल बताया, जो खेती योग्य भूमि की कमी और शहरी क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी (अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट) जैसी समस्याओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर रही है।
उद्यान निदेशालय, कृषि विभाग, बिहार द्वारा संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी एवं अर्ध-शहरी किसान परिवारों, श्रमिक परिवारों, महिलाओं और मध्यम वर्ग के लिए पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और अतिरिक्त आय के अवसर सृजित करना है। इसके लिए 317 लाख रुपये की स्वीकृत राशि उपलब्ध कराई गई है और वर्तमान में यह योजना पटना, गया, मुजफ्फरपुर तथा भागलपुर नगर निगम क्षेत्रों में सफलतापूर्वक क्रियान्वित की जा रही है।
योजना के तहत, लाभार्थियों को दो मॉडलों पर 75 प्रतिशत तक का भारी अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इसमें 30 गमलों (पौधों सहित) की एक इकाई की लागत 10,000 रुपये निर्धारित है, जबकि 'फार्मिंग बेड मॉडल' की लागत 60,000 रुपये है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 428 लाभार्थी इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।
कृषि मंत्री ने बताया कि छतों पर हरित आवरण विकसित होने से घरों का तापमान नियंत्रित रहता है, जिससे भीषण गर्मी में उल्लेखनीय राहत मिलती है। यह पहल वायु प्रदूषण कम करने, कार्बन अवशोषण बढ़ाने और स्वच्छ वातावरण बनाने में भी सहायक है। छत पर उगाई गई जैविक सब्जियां, फल, फूल एवं औषधीय पौधे परिवारों को ताजा, रसायनमुक्त और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराते हैं, जिससे पोषण सुरक्षा मजबूत होती है और घरेलू खर्चों में कमी आती है।
यह योजना केवल पर्यावरण और पोषण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक सशक्तिकरण का भी मार्ग प्रशस्त कर रही है। इससे अतिरिक्त उपज बेचकर आय अर्जित करने की संभावना बनती है। रोपाई, रख-रखाव, वर्मी-कम्पोस्ट निर्माण, पौध नर्सरी, ग्रो-बैग एवं गमला निर्माण, माइक्रो सिंचाई, पैकिंग तथा होम डिलीवरी जैसी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ‘ग्रीन जॉब्स’ का सृजन हो रहा है। महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए ‘छत बागवानी सेवा-दल’ के गठन से प्रशिक्षण और सामुदायिक विपणन के अवसर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे महिलाओं को नियमित आय प्राप्त हो सके। वहीं, युवाओं के लिए ‘रूफटॉप गार्डन’ स्थापना और परामर्श सेवाओं के रूप में उद्यमिता के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
मंत्री राम कृपाल यादव ने अपने संबोधन में कहा, “हमारे किसान भाई-बहन और शहरी गरीब परिवार सीमित संसाधनों में भी अपनी छत को उपजाऊ बनाकर पोषण और आय दोनों बढ़ा सकते हैं। ‘छत पर बागवानी’ योजना से ताजा एवं सुरक्षित भोजन मिलेगा, घरेलू खर्च घटेगा और महिलाओं तथा युवाओं के लिए हरित रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। प्रत्येक शहरी परिवार अपनी छत को हरित बनाकर स्वस्थ परिवार, स्वच्छ वातावरण और आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण में सहभागी बने — यही हमारा संकल्प है।”
इच्छुक लाभार्थी अपने संबंधित नगर निगम क्षेत्र के उद्यान/कृषि कार्यालय अथवा जिला उद्यान पदाधिकारी से संपर्क कर योजना की पात्रता एवं आवेदन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 'छत पर बागवानी' योजना सौंदर्यीकरण, पोषण सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने वाली एक समेकित पहल है, जो एक हरित, स्वस्थ और आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।