राज्य मंत्रिपरिषद् की बैठक में कृषि विभाग की 9 महत्वपूर्ण योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य राज्य में तेलहन, दलहन और गेहूँ के उत्पादन को बढ़ावा देना, उद्यानिक फसलों को प्रोत्साहन देना, जलवायु अनुकूल कृषि को अपनाना तथा कृषि क्षेत्र में विविधीकरण और सतत विकास को गति देना है। उप मुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि यह निर्णय राज्य के किसानों को नई तकनीक और संसाधनों का लाभ पहुँचाने में मील का पत्थर साबित होगा।
इन व्यापक पहलों के तहत, बिहार कृषि विभागीय आशुलिपिक संवर्ग नियमावली, 2025 के आलोक में विभागीय कार्यों के सुचारु संचालन के लिए 218 नए पदों के सृजन को भी स्वीकृति मिली है, जिससे विभाग की कार्यक्षमता में सुधार आएगा। कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय सुदृढ़ करने के लक्ष्य के साथ, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कई प्रमुख योजनाओं को हरी झंडी मिली है। इनमें राष्ट्रीय खाद्य तेल-तेलहन मिशन के तहत तेलहनी फसलों को बढ़ावा देने हेतु 25.85 करोड़ रुपये और रबी मौसम में दलहन मसूर उत्पादन कार्यक्रम के लिए 95.85 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसी तरह, रबी में गेहूँ बीज विस्थापन दर बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत 36 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
राज्य में वर्षा आधारित क्षेत्रों के विकास हेतु रेनफेड एरिया डेवलपमेंट (RAD) योजना के लिए 34.46 करोड़ रुपये की धनराशि को स्वीकृति मिली है। उद्यानिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए विशेष हस्तक्षेप योजना के तहत 38.26 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। लखीसराय के कृषि उत्पादन बाजार समिति परिसर के आधुनिकीकरण एवं समुचित विकास के लिए 41.71 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है, जिसमें चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कृषि के विविध आयामों को मजबूत करना और किसानों तक बेहतर बाजार पहुँचाना ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
इसके अतिरिक्त, जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने हेतु राज्य स्कीम मद से 31.25 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। कृषि यंत्रीकरण को गति देने के लिए केंद्र प्रायोजित PM-RKVY अंतर्गत सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन योजना के कार्यान्वयन हेतु 153.64 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
उप मुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दोहराया कि इन योजनाओं से राज्य में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, किसानों की आय वृद्धि, कृषि में तकनीकी उन्नति और बाजार ढाँचे का आधुनिकीकरण सुनिश्चित होगा। बिहार सरकार किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता के संकल्प को पूरा करने के लिए लगातार प्रयासरत है।