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कृषि यंत्र बैंक: युवा किसानों के लिए रोजगार और आधुनिक खेती का नया अवसर

AgriPress Staff AgriPress Staff
Updated 16 August, 2025 4:09 PM IST
कृषि यंत्र बैंक: युवा किसानों के लिए रोजगार और आधुनिक खेती का नया अवसर

कृषि विज्ञान केंद्र, जाले (दरभंगा) में वरिष्ठ वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर की अध्यक्षता में कृषि यंत्र बैंक प्रबंधन पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण का समापन 16 अगस्त 2025 को प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ। प्रशिक्षण समन्वयक और कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक ई. निधि कुमारी ने बताया कि इस कार्यक्रम में 23 युवा किसानों ने हिस्सा लिया और उन्हें आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग, रखरखाव और लाभों की जानकारी दी गई।


प्रशिक्षण में खेती में उपयोग होने वाले विभिन्न आधुनिक यंत्रों जैसे प्राइमरी टिलेज यंत्र, सेकेंडरी टिलेज यंत्र, सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, रेज्ड बेड प्लांटर, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, मेज डिबलर, सीडलिंग ट्रांसप्लांटर, ऑटोमैटिक पोटेटो प्लांटर, स्वचालित रीपर कम बाइंडर, मिनी हार्वेस्टर, कंबाइन हार्वेस्टर, ब्रश कटर और हेय रैक आदि के उपयोग और रखरखाव पर जोर दिया गया। साथ ही, लेजर लैंड लेवलर तकनीक से खेत समतलीकरण के फायदों की जानकारी दी गई।



ई. निधि ने बताया कि समतलीकरण से उत्पादकता में 2% तक वृद्धि हो सकती है, साथ ही जल प्रबंधन, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन और फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा मिलता है। स्ट्रॉ बेलर जैसे यंत्रों से फसल अवशेषों का प्रबंधन संभव है, जिससे भविष्य में रोजगार सृजन के अवसर बढ़ेंगे।


कृषि यंत्र बैंक की स्थापना के लिए युवा किसानों को प्रेरित किया गया। बिहार सरकार की कृषि यंत्र बैंक योजना के तहत कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने के लिए 80% तक सब्सिडी दी जा रही है, जिसमें किसानों को केवल 20% निवेश करना होगा। इस योजना का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को सस्ती दरों पर आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराना है, ताकि वे समय पर और कम लागत में खेती कर सकें।



ई. निधि ने कहा कि मजदूरों की कमी और बढ़ती मजदूरी के कारण समय पर खेती में बाधा आती है। कृषि यंत्र बैंक इस समस्या का समाधान है और युवाओं के लिए रोजगार सृजन का माध्यम भी बन सकता है। बिहार सरकार द्वारा खेती-बाड़ी और बागवानी में उपयोग होने वाले यंत्रों की खरीद पर सब्सिडी दी जा रही है, जिससे किसानों को कम लागत में उन्नत उपकरण मिल सकें।


इस अवसर पर उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा, डॉ. पूजा कुमारी, डॉ. चंदन कुमार और केवीके के अन्य कर्मचारी मौजूद थे। यह प्रशिक्षण युवा किसानों के लिए तकनीकी ज्ञान और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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