डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, समस्तीपुर के गन्ना अनुसंधान संस्थान के सभागार में हाल ही में गुड़ उत्पादन एवं प्रसंस्करण विषय पर आधारित एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सात दिवसीय कार्यक्रम में राज्य के दस से अधिक जिलों के किसान प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
इस मौके पर उपस्थित विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पी एस पांडेय ने प्रशिक्षणार्थियों से वन टू वन बातचीत की। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार में गुड़ उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। आपको बता दें कि वर्तमान में राज्य में ज्यादातर गुड़ पश्चिम उत्तर प्रदेश से आता है, लेकिन वर्तमान सरकार गुड़ के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना चाहती है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय राज्य सरकार के सहयोग से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में गुड़ प्रसंस्करण उद्योग को विकसित करने के प्रयास में जुटा है। यह प्रशिक्षण भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
डॉ पी एस पांडेय ने स्पष्ट किया कि 'चौथे कृषि रोड मैप' के तहत विश्वविद्यालय राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने किसानों से विशेष आग्रह किया कि वे सिर्फ गुड़ प्रसंस्करण की तकनीक ही नहीं, बल्कि गुड़ की मार्केटिंग और ब्रांडिंग के बारे में भी गहन जानकारी हासिल करें, ताकि उन्हें बेहतर मुनाफा मिल सके। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को आश्वस्त किया कि वैज्ञानिक उन्हें आसान भाषा में सभी चीजें समझाएंगे और उन्हें प्रश्न पूछने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।
500 प्रसंस्करण उद्योग शुरू करने का लक्ष्य
गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ देवेन्द्र सिंह ने बताया कि संस्थान ने कुलपति के नेतृत्व में पिछले तीन साल में पांच से अधिक नए प्रभेद और तकनीक विकसित की है, जिनकी सराहना राष्ट्रीय स्तर पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की मीटिंग में भी की गई है। उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि आने वाले दो वर्ष में विश्वविद्यालय का लक्ष्य राज्य में पांच सौ से अधिक गुड़ प्रसंस्करण उद्योग शुरू कराना है, जिसको लेकर युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ठंड को देखते हुए प्रशिक्षुओं के लिए रहने और खाने का समुचित इंतजाम किया गया है।
स्नातकोत्तर कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ मयंक राय ने कहा कि गन्ना उत्पादन में बिहार का समृद्ध इतिहास रहा है, भले ही बीच में यह क्षेत्र पिछड़ गया था, लेकिन अब यह तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य कारणों से लोग अब चीनी की तुलना में गुड़ को अधिक पसंद कर रहे हैं, जो किसानों के लिए एक बड़ा अवसर है। इस कार्यक्रम के दौरान बिहार सरकार के उपनिदेशक गन्ने और अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मंच संचालन डा सुनीता मीणा ने किया।