डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा ने हाल ही में गुलदाउदी फूलोत्सव फील्ड डे का भव्य आयोजन किया। इस अवसर पर गुलदाउदी के विभिन्न रंगों की सौ से अधिक प्रजातियों के फूल प्रदर्शित किये गये, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में किसान और आम लोग उपस्थित हुए।
इस महत्वपूर्ण आयोजन के दौरान, कुलपति डॉ पी एस पांडेय ने फूलों की खेती के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि फूल केवल साज-सज्जा का साधन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग हैं, जिनका उपयोग त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों में होता है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि बिहार में फूलों की खेती की अच्छी संभावनाएं हैं, इसके बावजूद राज्य में अधिकांश फूल पश्चिम बंगाल के कोलकाता सहित अन्य राज्यों से आयात किए जाते हैं।
कुलपति डॉ पांडेय ने वैज्ञानिकों को कड़ा निर्देश दिया कि वे किसानों को फूलों की खेती की ओर जागरूक करें, ताकि वे इसकी व्यावसायिक संभावनाओं का लाभ उठा सकें। उन्होंने यह जानकारी भी दी कि विश्वविद्यालय गुलदाउदी के की नयी प्रजातियों को विकसित करने के अंतिम चरण में है, जिन्हें जल्द ही अनुसंधान परिषद की बैठक में रिलीज के लिए प्रस्तुत किया जायेगा। फूलोत्सव के दौरान विश्वविद्यालय ने फूलों से बने विभिन्न गहनों, मालाओं और बुके का भी प्रदर्शन किया, जो आकर्षण का केंद्र रहे।
स्नातकोत्तर महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ मयंक राय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कुलपति डॉ पांडेय का लक्ष्य बिहार राज्य को फूल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। किसानों और आम लोगों को जागरूक करने के लिए ही इस फूलोत्सव फील्ड डे का आयोजन किया जा रहा है । उन्होंने घोषणा की कि विश्वविद्यालय अगली बार से इस आयोजन को वृहत समारोह के रूप में आयोजित करेगा और साथ ही किसानों को फूलों की खेती पर विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
कुलसचिव डॉ पी के प्रणव ने बाजार की उपलब्धता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य में फूलों का अच्छा बाजार उपलब्ध है, ऐसे में फूलों की खेती से किसानों को न केवल अच्छी आमदनी होगी, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में इस तरह के आयोजन लोगों में कृषि के प्रति जागरूकता बढ़ाएंगे।
गौरतलब है कि गुलदाउदी फूलोत्सव फील्ड डे का सफल आयोजन डॉ रौशनी अग्निहोत्री एवं डॉ पार्वती देवरम्मा के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम के दौरान गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ देवेन्द्र सिंह, स्कूल आफ़ एग्री-बिजनेस एंड रूरल मैनेजमेंट के निदेशक डॉ रामदत्त, सह निदेशक अनुसंधान डॉ एस के ठाकुर, डॉ शिवपूजन सिंह, डॉ महेश कुमार, डॉ कुमार राज्यवर्धन समेत कई शिक्षक, वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।