बिहार के मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जैसे जिलों के गांवों में, जहां किसान लंबे समय से महंगे डीजल और अनिश्चित मानसून से जूझ रहे थे, अगा खान फाउंडेशन (AKF) द्वारा शुरू की गई एक पहल ने उम्मीद की नई किरण जलाई है। इस पहल के तहत सौर ऊर्जा से चलने वाले सिंचाई पंप न केवल सिंचाई की लागत को काफी कम कर रहे हैं, बल्कि किसानों, विशेषकर महिला उद्यमियों की आय बढ़ाकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।
यह पहल दो मुख्य मॉडलों पर काम कर रही है। पहले मॉडल में, महिला स्वयं सहायता समूह मिलकर सौर पंप का संचालन करते हैं, जिससे सामूहिक रूप से सिंचाई की जरूरतें पूरी होती हैं। दूसरा और अधिक प्रभावी मॉडल सौर उद्यमी का है, जिसमें कोई एक व्यक्ति निजी तौर पर सौर पंप स्थापित करता है और व्यावसायिक आधार पर अन्य किसानों को पानी बेचता है। इस उद्यमी मॉडल ने विशेष रूप से बेहतर परिणाम दिखाए हैं।
इस परियोजना के आंकड़े प्रभावशाली हैं। सौर पंपों के उपयोग से किसानों की सिंचाई लागत में औसतन 44% तक की कमी आई है। एक सौर उद्यमी सालाना ₹1.5 लाख तक की कमाई कर रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। वहीं, पानी खरीदने वाले किसानों को भी पहले की तुलना में काफी बचत हो रही है। सस्ती और विश्वसनीय सिंचाई की उपलब्धता ने किसानों को पारंपरिक फसलों से हटकर सब्जियों जैसी अधिक मुनाफे वाली खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। मुजफ्फरपुर की देवकी देवी और लाडली खातून जैसी कई महिलाएँ कर्ज लेकर सौर पंप लगा चुकी हैं और आज वे सफल उद्यमी बनकर अपने परिवारों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर रही हैं।
हालांकि, इस सफल क्रांति के सामने एक बड़ी चुनौती सरकारी नीति का अभाव है। बिहार में सौर पंपों के लिए फिलहाल कोई सक्रिय योजना मौजूद नहीं है। इसके अलावा, सरकार द्वारा डीजल और ग्रिड बिजली पर दी जाने वाली सब्सिडी सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई के व्यापक विस्तार में बाधा बन रही है। खेती में पानी की उपलब्धता और लागत पर नियंत्रण ही फसल की सफलता की कुंजी है। सौर ऊर्जा ने हमें यह आजादी दी है। इस मॉडल में ग्रामीण बिहार में एक बड़ा बदलाव लाने की अपार क्षमता है।
अगा खान फाउंडेशन की यह पहल बिहार के कृषि क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा रही है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति सुधर रही है और वे अधिक टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपना रहे हैं। इस सफल मॉडल को राज्य भर में व्यापक रूप से अपनाने के लिए एक सहायक और सक्रिय सरकारी नीति की तत्काल आवश्यकता है।