बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक मौन सौर क्रांति जन्म ले रही है, जहाँ महिलाएं सौर ऊर्जा के माध्यम से सिंचाई की पारंपरिक चुनौतियों को पार करते हुए आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। कुछ साल पहले तक, मुजफ्फरपुर की रानी देवी जैसी महिलाओं के लिए हर फसल एक जुआ थी, जो महंगे डीज़ल पंप और सिंचाई के लिए पैसे मांगने के संघर्ष से जूझ रही थीं। लेकिन अब, आगा खान ग्रामीण सहायता कार्यक्रम की सौर सिंचाई पहल के तहत, वे अपने खेतों को सींचने के साथ-साथ आस-पास के किसानों को पानी बेचकर उद्यमी बन गई हैं।
रानी देवी ने हिम्मत जुटाकर कर्ज लिया और अपने खेत में 5 HP का सौर पंप लगवाया, भले ही उन्हें पति और समाज के विरोध का सामना करना पड़ा। आज, वह गर्व से कहती हैं कि सौर ऊर्जा से होने वाली कमाई से उनके बच्चे पढ़ पा रहे हैं और उन्हें अब किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता। उनकी कहानी बिहार के उन सैकड़ों गांवों में फैल रही एक बड़े बदलाव का प्रतीक है, जहाँ सौर ऊर्जा महिलाओं के हाथों में आर्थिक ताकत देकर उन्हें सामाजिक बंधनों को चुनौती देने में सक्षम बना रही है।
यह मॉडल दो मुख्य तरीकों से काम करता है कहीं महिला स्वयं सहायता समूह मिलकर सौर पंप का संचालन कर रहे हैं, तो कहीं रानी देवी जैसी महिलाएं व्यक्तिगत उद्यमी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। इस पहल का सीधा परिणाम किसानों को मिल रहा है, जो पहले सिंचाई के लिए ₹120 प्रति घंटा खर्च करते थे, अब सौर ऊर्जा से वही काम आधे से भी कम लागत में कर पा रहे हैं। सस्ती और विश्वसनीय सिंचाई उपलब्ध होने से किसान अब केवल गेहूं और धान जैसे पारंपरिक फसलों के चक्र से निकलकर सब्जियों जैसी अधिक मुनाफे वाली फसलें उगाने लगे हैं। यह केवल पानी नहीं, यह ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि का एक नया स्रोत है जो स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है।
हालांकि, इस सौर क्रांति की राह में कुछ चुनौतियाँ भी हैं। इन उभरते उद्यमियों के सामने सबसे बड़ी बाधा सरकार की मौजूदा नीतियां हैं। बिहार में सौर पंपों के लिए कोई स्पष्ट और ठोस नीति का अभाव है, वहीं दूसरी ओर सरकार डीज़ल और बिजली पर भारी सब्सिडी प्रदान कर रही है। यह सब्सिडी सौर ऊर्जा को अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिस्पर्धात्मक रूप से कमजोर बनाती है। इसके अलावा, बिजली चोरी से चलने वाले पंप कई बार कम लागत में भी सिंचाई प्रदान करते हैं, जिससे रानी देवी जैसी ईमानदार सौर उद्यमियों के लिए बाज़ार में टिके रहना कठिन हो जाता है।
रानी देवी जैसी महिलाओं ने व्यक्तिगत साहस और दृढ़ संकल्प से अपना रास्ता बना लिया है। लेकिन इस क्रांति को पूरे बिहार में फैलाने और इसके पूर्ण लाभों को प्राप्त करने के लिए नीति-निर्माताओं को अपनी वर्तमान रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा। यह देखना होगा कि क्या सरकार इस उभरते हुए सूरज की रोशनी को पहचान कर उसके लिए अनुकूल नीतियां बनाएगी।