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कृषि समाचार

बदलती जलवायु में उन्नत खेती ही समाधान; राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र ने 10 ज़िलों के किसानों को दी उच्च-स्तरीय ट्रेनिंग

Ramjee Kumar Ramjee Kumar
Updated 9 January, 2026 6:43 PM IST
बदलती जलवायु में उन्नत खेती ही समाधान; राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र ने 10 ज़िलों के किसानों को दी उच्च-स्तरीय ट्रेनिंग

मुज़फ़्फ़रपुर। लीची उत्पादक किसानों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने और उन्हें आधुनिक एवं वैज्ञानिक बागवानी पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से भाकृअनुप–राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र (ICAR–NRCL), मुज़फ़्फ़रपुर में एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण बामेती, पटना के सहयोग से 06 से 08 जनवरी 2026 तक आयोजित किया गया, जिसका मुख्य विषय ‘लीची की बागवानी में उत्तम कृषि पद्धतियाँ’ था।


इस उच्च-स्तरीय कार्यक्रम में बिहार के 10 विभिन्न जिलों से आए प्रखंड तकनीकी प्रबंधकों एवं चयनित प्रगतिशील लीची उत्पादक किसानों सहित कुल 20 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस प्रशिक्षण का प्राथमिक लक्ष्य प्रतिभागियों को लीची उत्पादन को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने में सक्षम बनाना था।


समापन सत्र को संबोधित करते हुए केन्द्र के निदेशक डॉ. बिकाश दास ने किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज जब जलवायु परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं, ऐसे में पारंपरिक खेती पद्धतियों के स्थान पर वैज्ञानिक एवं उन्नत तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है। डॉ. दास ने यह भी कहा कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से न केवल लीची की उत्पादकता में वृद्धि होगी, बल्कि गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार किया जा सकेगा, जो अंततः किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा।


प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. भाग्या वजियन ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि यह पूरा प्रशिक्षण पूरी तरह से व्यावहारिक दृष्टिकोण पर केंद्रित था। प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि प्रयोगशाला के साथ-साथ खेत स्तर पर भी आधुनिक तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन तकनीकों को प्रभावी रूप से लागू कर सकें।


कार्यक्रम के दौरान केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा लीची उत्पादन से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर गहन व्याख्यान एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रमुख विषयों में उन्नत पौध सामग्री का चयन एवं रोपण प्रबंधन, एकीकृत पोषक तत्व एवं कीट–रोग प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली एवं जल उपयोग दक्षता, जलवायु-संवेदनशील तकनीकें, उच्च सघनता बागवानी (High Density Planting), वैज्ञानिक छंटाई, तुड़ाई उपरांत प्रबंधन (Post-harvest management) तथा मूल्य संवर्धन जैसे विषय शामिल रहे।


प्रशिक्षण में भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें लीची उत्पादन को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने में निश्चित रूप से मदद मिलेगी। समापन अवसर पर केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विनोद कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अभय कुमार सहित अन्य वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

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