बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर के सबौर एग्री इन्क्यूबेटर्स (SABAGRIs) ने हाल ही में कृषि-आधारित प्रौद्योगिकी एवं नवाचार को वाणिज्यिक स्तर तक पहुँचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने 'एग्री-स्टार्टअप प्रोत्साहन कार्यक्रम' के तहत 10 नवाचार-आधारित स्टार्टअप्स के साथ समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके अंतर्गत कुल ₹118 लाख का अनुदान स्वीकृत किया गया है। इसमें से ₹69 लाख की पहली किस्त तत्काल जारी की जाएगी। यह वित्तीय सहयोग अनुसंधान एवं विकास को उद्योगोन्मुख बनाएगा और कृषि मूल्य श्रृंखला में तकनीकी हस्तक्षेप, उत्पाद विविधीकरण, संसाधन दक्षता तथा किसान आय वृद्धि को Technology Readiness Level (TRL)-6 से TRL-9 तक ले जाने में सहायक होगा।
स्टार्टअप एंड एग्री-इनोवेशन प्रोग्राम (SAIP) श्रेणी के तहत छह उच्च-स्तरीय स्टार्टअप्स को ₹98 लाख का वित्तीय अनुदान दिया गया है, जिसमें से ₹49 लाख प्रथम किस्त के रूप में जारी होंगे। इन चयनित स्टार्टअप्स का फोकस अत्याधुनिक बायोटेक्नोलॉजी, फूड प्रोसेसिंग, सप्लाई-चेन लॉजिस्टिक्स और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर है। इनमें कामयाबियाग्रो बायोसाइंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (उपेंद्र कुमार वर्मा) को ₹18 लाख जैव-उर्वरक के लिए, बिरो पावर प्राइवेट लिमिटेड (रजनीश कुमार) को ₹20 लाख नवीकरणीय ऊर्जा आधारित कृषि उपकरणों के लिए, इम्ज़ैक ऑर्गेनिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (मोहम्मद ज़ाकी इमाम) को ₹17 लाख जैविक खाद के लिए, बृहत नेचुरल फ़ूड प्राइवेट लिमिटेड (मनीष सिंह) को ₹15 लाख न्यूट्रास्यूटिकल के लिए, जीतबान सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड (विकास कुमार) को ₹18 लाख डिजिटल एवं कोल्ड-चेन आपूर्ति श्रृंखला के लिए, और श्ही फ़ूड प्राइवेट लिमिटेड (अब्दुल अल्लम फ़राज़) को ₹10 लाख फूड प्रोसेसिंग एवं स्मार्ट पैकेजिंग के लिए दिए गए हैं।
वहीं, 'आइडिया टू ऑपर्च्युनिटी प्रोग्राम (AOP)' श्रेणी में चार स्टार्टअप्स को ₹5-5 लाख का वित्तीय अनुदान स्वीकृत किया गया है, जो Technology Incubation (TRL-3 से TRL-6) चरण में हैं। इनमें क्लू ड्रिंक्स/विशबिनो बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड (रजत केशरी) को नेचुरल ड्रिंक्स के लिए, एम.एन.ओ. स्वदेशी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (मोहम्मद नाज़ ओज़ैर) को ग्रामीण उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए, रूट एंड सूट (रेज़ाउल्लाह) को जैव-उर्वरक एवं कार्बन-न्यूट्रल खेती समाधानों के लिए, और जीवन ऑर्गेनिक्स एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड (केशव कुमार) को ऑर्गेनिक वैल्यू-चेन के लिए स्वीकृति मिली है। ₹20 लाख की यह राशि पूर्ण रूप से प्रथम किस्त के रूप में जारी की जाएगी।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डी.आर. सिंह ने इस पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि SABAGRIs का यह निवेश बिहार को एग्री-बिजनेस और टेक्नो-एंटरप्रेन्योरशिप हब के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने इसे कृषि को प्रौद्योगिकी आधारित, जलवायु-संवेदनशील और निर्यातोन्मुख बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया। निदेशक अनुसंधान एवं SABAGRIs के प्रमुख अनिल कुमार सिंह ने जोड़ा कि यह वित्तीय सहयोग कृषि क्षेत्र में डिजिटल एग्रीकल्चर, स्मार्ट सप्लाई-चेन और हाई-वैल्यू क्रॉप प्रोसेसिंग जैसी तकनीकों को तेजी से जमीन पर उतारेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि चयनित स्टार्टअप्स किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ कृषि-उद्योग में स्टार्टअप इकोसिस्टम और IP-आधारित नवाचारों को सशक्त बनाएंगे।
यह सच है कि खेतों में तकनीकी प्रगति तभी दिखती है जब नवाचारों को पर्याप्त समर्थन मिले, और यह पहल उस कमी को पूरा करने की दिशा में एक सशक्त कदम है। यह पहल न केवल बिहार बल्कि पूरे पूर्वी भारत में कृषि-आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम, R&D-टू-मार्केट लिंकेज और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को मजबूती देगी। SABAGRIs द्वारा यह अनुदान प्रिसिजन फार्मिंग, फूड सिक्योरिटी, कार्बन-न्यूट्रल एग्रीकल्चर और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड वैल्यू चेन्स के लिए डीप टेक इनोवेशन को तेज़ करेगा।
कुल मिलाकर, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर का यह कदम कृषि नवाचार को 'लैब से लैंड और लैंड से मार्केट' तक पहुँचाने का एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिससे आने वाले वर्षों में पूर्वी भारत की कृषि अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की उम्मीद है।