कृषि विज्ञान केंद्र जाले दरभंगा में आज वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर की अध्यक्षता में कृषि अभियंत्रण विशेषज्ञ सह सामूहिक अग्रिम पंक्ति प्रक्षेपन (Front Line Demonstration) कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी ने तिलहन पंक्ति प्रत्यक्षण के तहत् प्रशिक्षण सह-उपादान वितरण का आयोजन किया। इस अवसर पर 20 एकड भूमि हेतु जाले प्रखंड के गरी गांव में कृषकों को राजेंद्र सुफलाम 1, एवं अन्य जरूरी दवा एवं खाद उपलब्ध कराया गया।
कार्यक्रम में डॉ. दिव्यांशु ने किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों की जानकारी दी तथा उन्नत किस्मों, बीज, जैव उर्वरक एवं कीटनाशक आदि का वितरण किया गया। साथ ही ई . निधि ने किसानों को इन तकनीकों के सही प्रयोग एवं लाभकारी प्रबंधन पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। किसानों को नई तकनीकों से जोड़ कर खेती करना एवं उनकी आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने हेतु विस्तृत जानकारी दी गई।इस अवसर पर किसानों को दवाओं की अनुसंशित मात्रा प्रयोग करने की जानकारी दी गई। जैसे कि शाकनाशी पेंडिमेथिलीन (30% EC शाकनाशी) की मात्रा लगभग 3–5 ml प्रति लीटर पानी में तथा इसका प्रयोग खरपतवार नियंत्रण के लिए (pre-emergence & early post-emergence) में करने के लिए बताया गया। दूसरी दवा इमेडाक्लोर्पीड (17.8% SL – कीटनाशी), इसकी मात्रा लगभग 0.3 ml प्रति लीटर पानी में बताया गया। इसका प्रयोग रस चूसक कीट जैसे माहू, सफेद मक्खी, जासिड परकरने की जानकारी दी गई। माइक्रोन्यूट्रींट के रूप में बोरॉन युक्त उर्वरक, जिसकी मात्रा लगभग 1–2 g प्रति लीटर पानी।
प्रयोग: सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी दूर करने हेतु प्रयोग किया जाता है। सल्फर (80% WP या 90% WG फफूंदनाशी/सूक्ष्म पोषक) इसकी मात्रा 2–3 g प्रति लीटर पानी में पाउडरी मिल्ड्यू व गंधक की कमी के लिए । कार्बेंडाजिम एवं मानकोजेब 50% WP – फफूंदनाशी)लगभग 2 g प्रति लीटर पानी में ब्लास्ट, झुलसा, दाग आदि रोगों के लिए।पत्ती झुलसा, झुलसी, फल/फूल रोग नियंत्रण।
दवा छिड़काव हमेशा सुबह या शाम को करें।निर्देश पुस्तिका/लेबल पर दी गई अधिकतम/न्यूनतम खुराक का पालन करें।विभिन्न रसायनों को मिलाने से पहले उनकी compatibility अवश्य जाँचें। स्प्रे करते समय दस्ताने, मास्क आदि सुरक्षा साधनों का प्रयोग करें।