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कृषि समाचार

पश्चिम चंपारण में कृषि विकास को मिली गति: 10 करोड़ का दुग्ध संयंत्र और 1.21 करोड़ का मत्स्य अनुदान

AgriPress Staff AgriPress Staff
Updated 5 September, 2025 11:05 AM IST
पश्चिम चंपारण में कृषि विकास को मिली गति: 10 करोड़ का दुग्ध संयंत्र और 1.21 करोड़ का मत्स्य अनुदान

पश्चिम चंपारण के बेतिया स्थित जिला सभागार में पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग द्वारा पशुधन और मत्स्य पालन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास और किसानों को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विभाग की मंत्री रेणु देवी ने हरिवाटिका मत्स्य बीज प्रक्षेत्र पर नवनिर्मित खुदरा मत्स्य बिक्री बाजार का उद्घाटन किया, साथ ही 10 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अत्याधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र तथा दो पशु चिकित्सालय भवनों का शिलान्यास किया। इस कार्यक्रम में बेतिया और आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों किसानों को विभिन्न योजनाओं के तहत डमी चेक, किट और कार्यादेश वितरित किए गए।


कार्यक्रम के दौरान हरिवाटिका मत्स्य बीज प्रक्षेत्र पर निर्मित खुदरा मत्स्य बिक्री बाजार का उद्घाटन किया गया, जिसका उद्देश्य जिले में आमजन तक स्वच्छ एवं ताजी मछली की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसके अतिरिक्त, कॉम्फेड के तिरहुत दुग्ध संघ के अंतर्गत राज्य सरकार के सहयोग से 10 करोड़ रुपये की लागत से 1 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के अत्याधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र का शिलान्यास किया गया। इस संयंत्र से पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और आसपास के क्षेत्रों के लगभग 25,000 दुग्ध उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। यह स्थानीय स्तर पर 300 से अधिक प्रत्यक्ष और 1,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा। अनुमंडलीय पशु चिकित्सालय, बेतिया एवं जिलास्तरीय संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र बेतिया के नवीन भवनों का शिलान्यास भी किया गया, जिससे पशुपालकों को पशु चिकित्सा सुविधाएँ सुगम होंगी।


इस कार्यक्रम में 600 से अधिक किसानों और उद्यमियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया गया। मत्स्य प्रभाग के तहत 355 लाभुकों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और राज्य योजना के तहत तालाब निर्माण, मुख्यमंत्री मछुआरा कल्याण योजना के तहत 300 शिकारमाही एवं विपणन किट, 20 साईकिल-सह-आईस बॉक्स तथा अनुदान की राशि के 35 डमी चेक वितरित किए गए, जिसमें कुल 121.43 लाख रुपये का अनुदान शामिल था। इसके अतिरिक्त, पशुपालन निदेशालय के तहत 230 शुकर पालन और बकरी पालन कृषकों को स्वीकृति आदेश और गव्य विकास निदेशालय के तहत 10 कृषकों को कार्यादेश/डमी चेक प्रदान किए गए। कॉम्फेड के तहत भी 10 लाभुकों को कवर किया गया। मुख्यमंत्री मछुआ कल्याण योजना के तहत लाभार्थियों को 100 प्रतिशत अनुदान पर मत्स्य शिकारमाही एवं विपणन किट का वितरण किया गया, जबकि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजनान्तर्गत साईकिल-सह-आईस बॉक्स का फ्लैग ऑफ भी किया गया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभाग की अपर मुख्य सचिव, डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने मत्स्य प्रक्षेत्र, पशुपालन, गव्य एवं कॉम्फेड के क्षेत्र में किसानों/उद्यमियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा, "राज्य में मत्स्य उत्पादन का कारोबार 25 हजार करोड़ का है, और इसे 1 लाख करोड़ तक पहुँचाने की अपार संभावनाएँ हैं, जिन पर हमें विशेष ध्यान देना होगा।" मंत्री रेणु देवी ने बताया कि राज्य में वर्ष 2024-25 में मत्स्य उत्पादन 9.59 लाख मीट्रिक टन रहा, जिसमें पश्चिम चंपारण का योगदान 38.50 हजार मीट्रिक टन था। उन्होंने यह भी बताया कि बिहार राज्य देश में मीठे पानी के मछली उत्पादन में चौथे स्थान पर है और यहाँ से प्रति वर्ष 39.07 हजार टन मछली देश के प्रमुख शहरों में भेजी जा रही है।


कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम बिहार में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। नए बुनियादी ढांचों के निर्माण और किसानों को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाने वाली योजनाओं के माध्यम से, सरकार का लक्ष्य न केवल उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करना भी है।

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