बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर के उद्यान विभाग (फल एवं फल प्रौद्योगिकी) द्वारा दिनांक 18 नवंबर को नारियल किसानों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय समन्वित रोपण फसल परियोजना (नारियल एवं ताड़) की अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत हुआ, जिसका मुख्य विषय ‘नारियल में समेकित पोषण एवं जल प्रबंधन’ था।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए निदेशक अनुसंधान, डाॅ. अनिल कुमार सिंह ने युवा प्रशिक्षुओं को प्रेरित करते हुए कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से नवाचार (Innovation) और उद्यमिता (Entrepreneurship) विकास की सोच के साथ आगे बढ़ने पर जोर दिया।
इस बात की जानकारी देते हुए डाॅ. सिंह ने कहा, आप कृषि में नए विचार लेकर आएँ। विश्वविद्यालय आपके साथ हर कदम पर है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से हम न केवल तकनीकी सहायता बल्कि वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने के लिए भी तैयार हैं। आपको नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनना है।
विशिष्ट अतिथि, सह-अधिष्ठाता-सह-प्राचार्य डाॅ. मुकेश कुमार सिन्हा ने जोर देते हुए कहा कि प्रशिक्षण तभी सफल होता है जब उससे सीधे तौर पर किसानों की आर्थिक उन्नति सुनिश्चित हो सके। उन्होंने प्रतिभागियों से उद्यान विभाग से विभिन्न विषयों की जानकारी प्राप्त कर नई तकनीकों को अपनाने की अपील की।
इस संपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन परियोजना की मुख्य अन्वेषक एवं उद्यान विभाग (फल) की विभागाध्यक्ष डाॅ. रूबी रानी के द्वारा किया गया। तकनीकी सत्र में डाॅ. रूबी रानी ने नारियल की उन्नत रख-रखाव विधियों, समुचित पोषण प्रबंधन और किसानों के विभिन्न सवालों के समाधान पर विस्तृत चर्चा की।
इसके अलावा, डाॅ. अहमर अफताब ने ताड़ की महत्ता और इससे बनने वाले मूल्य संवर्धित उत्पादों की जानकारी दी, जबकि डाॅ. शशि प्रकाश ने नारियल आधारित कृषि प्रणाली के लाभ बताए। नारियल में प्रभावी जल प्रबंधन के वैज्ञानिक उपायों पर डाॅ. डी. के. जायसवाल ने विस्तृत ज्ञान साझा किया।
आपको बता दें कि इस प्रशिक्षण में कुल 40 किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान इन सभी प्रतिभागियों को इनपुट सामग्री के रूप में नारियल के पौधे एवं छिड़काव मशीनें भी प्रदान की गईं। प्रशिक्षण के प्रायोगिक चरण में, किसानों को नारियल में उर्वरक डालने की संपूर्ण प्रक्रिया का प्रत्यक्ष प्रदर्शन (डेमो) भी कराया गया, ताकि वे व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त कर सकें। संपूर्ण कार्यक्रम का मंच संचालन डाॅ. प्रीति सिंह, वैज्ञानिक, उद्यान विभाग द्वारा प्रभावी रूप से किया गया।