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कृषि समाचार

कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा आधुनिक कृषि यंत्रों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन

AgriPress Staff AgriPress Staff
Updated 22 August, 2025 11:23 AM IST
कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा आधुनिक कृषि यंत्रों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन

दरभंगा जिले के जाले प्रखंड स्थित खजुरवाड़ा गाँव में कृषि विज्ञान केन्द्र जाले दरभंगा की ओर से एक महत्वपूर्ण एक दिवसीय गैर संस्थागत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य विषय खेती में आधुनिक कृषि यंत्रों की भूमिका था, जिसका उद्देश्य स्थानीय किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से अवगत कराना था।


कार्यक्रम की प्रशिक्षण समन्वयक एवं कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक ई. निधि कुमारी ने किसानों को संबोधित करते हुए वर्तमान कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आज के दौर में श्रमिकों की बढ़ती कमी और खेती में लगातार बढ़ते श्रम लागत के कारण कई किसान अपनी पारंपरिक खेती छोड़कर आजीविका की तलाश में दूसरे प्रदेशों का रुख कर रहे हैं।


आधुनिक कृषि यंत्रों से होगी लागत में कमी

ई. निधि कुमारी ने इस समस्या के समाधान के रूप में आधुनिक कृषि यंत्रों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक कृषि यंत्रों के उचित प्रयोग से खेती की लागत में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में कृषि को पूर्णतः आधुनिक यंत्रों से सुसज्जित करना आवश्यक होगा, ताकि युवा पीढ़ी कृषि को केवल परंपरागत काम न मानकर एक लाभदायक व्यवसाय के रूप में देखे।


ट्रैक्टर का बहुआयामी उपयोग

प्रशिक्षण के दौरान ई. निधि कुमारी ने बताया कि अधिकतर किसानों के पास ट्रैक्टर उपलब्ध है, लेकिन वे इसका उपयोग केवल जुताई के लिए करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इसी ट्रैक्टर का प्रयोग शून्य जुताई विधि या पंक्तिबद्ध तरीके से धान, गेहूं, मूंग, मसूर, धनिया, राई जैसी विभिन्न फसलों की बुआई के लिए भी किया जा सकता है।


उन्होंने जानकारी दी कि इस मशीन की बीज बोने की क्षमता लगभग 0.35 हेक्टेयर प्रति घंटे की है। इसके साथ ही इस मशीन में दानेदार उर्वरक को भी बुआई के समय ही मिट्टी में दिया जा सकता है, जिससे अलग से उर्वरक डालने की आवश्यकता नहीं होती।


अन्य उपयोगी कृषि यंत्रों की जानकारी

प्रशिक्षण में विभिन्न अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई। इनमें रीपर कम बाइंडर, लेजर लैंड लेवलर, वीडर, रेज्ड बेड प्लांटर, मेज डिबलर, राइस व्हीट सीडर, मल्चर, हेय रैक, पावर टीलर आदि प्रमुख हैं। इन सभी यंत्रों के प्रयोग से न केवल खेती का काम आसान हो जाता है, बल्कि समय और श्रम दोनों की बचत होती है।


व्यापक किसान भागीदारी

इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में खजुरवाड़ा गाँव के कुल 32 किसान भाइयों ने सक्रिय भागीदारी की। प्रशिक्षण में भाग लेने वाले प्रमुख किसानों में गुरुदयाल यादव, नथुनी यादव, विकास यादव, आनंद कुमार सहित अन्य स्थानीय किसान शामिल रहे।


यह प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ, जिससे उन्हें आधुनिक कृषि तकनीक की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई। कृषि विज्ञान केन्द्र के इस प्रयास से निश्चित रूप से क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा और कृषि क्षेत्र में नई तकनीक का प्रसार होगा।

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