बिहार राज्य सरकार ने शारदीय (खरीफ) 2025 के मौसम में किसानों को उर्वरक की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष पहल की है। राज्य में यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी जैसे आवश्यक उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, जिससे किसी भी जिले में कमी की स्थिति नहीं है। उप मुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि उर्वरक की कालाबाजारी और अधिक मूल्य पर बिक्री किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी, जिसके लिए कठोर निगरानी और कार्रवाई की जा रही है।
भारत सरकार द्वारा शारदीय (खरीफ) 2025 के लिए बिहार की उर्वरक आवश्यकता 10.32 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 2.20 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 2.50 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 0.50 लाख मीट्रिक टन एमओपी और 0.75 लाख मीट्रिक टन एसएसपी निर्धारित की गई है। इस आलोक में, राज्य सरकार ने आपूर्ति की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की है। वर्तमान में, 1.41 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.64 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 2.19 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 0.62 लाख मीट्रिक टन एमओपी और 1.02 लाख मीट्रिक टन एसएसपी का स्टॉक राज्य में उपलब्ध है।
उर्वरक वितरण में अनियमितता के विरुद्ध सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। शारदीय (खरीफ) 2025 के दौरान, 26 सितंबर 2025 तक, 56 प्रतिष्ठानों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है और 276 प्रतिष्ठानों के उर्वरक प्राधिकार पत्र रद्द किए गए हैं। विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि "उर्वरक की कालाबाजारी एवं अधिक मूल्य पर बिक्री किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" उन्होंने जिला एवं प्रखंड स्तरीय उर्वरक निगरानी समितियों की नियमित बैठकें अनिवार्य रूप से आयोजित करने का निर्देश दिया है ताकि उपलब्धता और मांग के अनुसार प्रखंडवार उप-आवंटन सुनिश्चित हो सके। पॉस मशीन में प्रदर्शित मात्रा और वास्तविक स्टॉक का मिलान कर पारदर्शिता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
राज्य सरकार ने कालाबाजारी और अधिक मूल्य पर बिक्री रोकने के लिए विशेष जांच दल का गठन किया है जो नियमित रूप से छापामारी और निरीक्षण कर रहा है। इसके अतिरिक्त, अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे जिलों में भी विशेष दल गठित किए गए हैं जो सशस्त्र सीमा बल के सहयोग से उर्वरक की तस्करी पर प्रभावी रोक लगा रहे हैं। विजय कुमार सिन्हा ने यह भी बताया कि "सीमा क्षेत्रों में छापामारी दल गठित कर उर्वरक तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जाएगी।" एक किसान ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, सही समय पर खाद मिल जाए तो फसल की रौनक ही कुछ और होती है, यह हमारी मेहनत को फल में बदल देती है।
बिहार सरकार शारदीय (खरीफ) 2025 में किसानों को समय पर और सही मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। विभाग निरंतर निगरानी कर रहा है ताकि किसानों की फसलों की उत्पादकता पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े और उन्हें आवश्यक कृषि इनपुट बिना किसी बाधा के मिल सकें। राज्य में उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता के साथ-साथ अनियमितताओं पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।