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कृषि समाचार

किसानों के लिए ऐतिहासिक फैसला: बिहार कृषि विश्वविद्यालय को ₹62 करोड़ की राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण परियोजना की जिम्मेदारी

Raushan Kumar Raushan Kumar
Updated 4 January, 2026 10:03 PM IST
किसानों के लिए ऐतिहासिक फैसला: बिहार कृषि विश्वविद्यालय को ₹62 करोड़ की राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण परियोजना की जिम्मेदारी

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने शिक्षा, शोध, नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक सहभागिता के क्षेत्र में बहुआयामी उपलब्धियाँ दर्ज करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान सुदृढ़ की है। आपको बता दें कि विश्वविद्यालय की हालिया सफलताओं में नैक से ‘ए’ ग्रेड मान्यता और कृषि एवं संबद्ध विषयों में एनआईआरएफ रैंक 36 शामिल है।


35 साल बाद शुरू हुआ सबसे बड़ा वैज्ञानिक मृदा सर्वेक्षण

विश्वविद्यालय को केंद्र सरकार की मृदा एवं भूमि उपयोग सर्वेक्षण संस्था (Soil and Land Use Survey of India – SLUSI) द्वारा राष्ट्रीय स्तर की एक ऐतिहासिक परियोजना का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह परियोजना ‘राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण परियोजना (National Soil Mapping Project – NSMP)’ है, जो पिछले 35 वर्षों में बिहार में की जा रही सबसे बड़ी और व्यापक वैज्ञानिक मृदा सर्वेक्षण परियोजना है। तीन वर्षीय इस परियोजना की कुल लागत ₹62 करोड़ है, जिसके अंतर्गत बिहार के सभी 38 जिलों के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल मृदा मानचित्र तैयार किए जाएंगे।


AI मौसम लैब से पंचायत स्तर तक पहुंचा सटीक पूर्वानुमान

शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में बीएयू सबौर ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित राज्य की पहली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित मौसम पूर्वानुमान प्रयोगशाला कृषि क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल है। यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला रियल-टाइम मौसम आंकड़ों के विश्लेषण के माध्यम से सटीक पूर्वानुमान तैयार करती है, जिसका डिजिटल माध्यमों के जरिए पंचायत स्तर तक त्वरित प्रसार किया जाता है। इससे किसान समय पर बुवाई, सिंचाई और फसल संरक्षण संबंधी निर्णय ले पाते हैं, जिससे प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिली है। इसके साथ ही, विश्वविद्यालय में 25 से अधिक अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, जिनमें ड्रोन प्रयोगशाला और फिनोटाइपिक प्रयोगशाला शामिल हैं, की स्थापना की गई है।


रिकॉर्ड तोड़ प्लेसमेंट और राष्ट्रीय फेलोशिप में प्रथम रैंक

शैक्षणिक मोर्चे पर भी बीएयू सबौर ने रिकॉर्ड बनाए हैं। 26 जुलाई 2025 को आयोजित 8वें दीक्षांत समारोह में कुल 793 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वर्ष 2025 में बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) एवं अन्य चयन प्रक्रियाओं के माध्यम से 350 से अधिक बीएयू छात्रों का चयन प्रखंड कृषि पदाधिकारी (BAO), अनुमंडल कृषि पदाधिकारी (SDAO) और सहायक निदेशक जैसे प्रतिष्ठित सरकारी पदों पर हुआ है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय के एक विद्यार्थी ने आईसीएआर–जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) परीक्षा में अखिल भारतीय प्रथम रैंक प्राप्त की, जो विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता को दर्शाता है।


उन्नत किस्में, GI टैग और किसान संरक्षण

विश्वविद्यालय ने इस वर्ष 7 उन्नत फसल किस्में (जिसमें धान की कतरनी, सांभा, विभूति शामिल हैं) और 8 नवीन कृषि तकनीकें किसानों के लिए संस्तुत कराई हैं। साथ ही, बीएयू सबौर के मार्गदर्शन में रोहतास के किसान नकुल सिंह को 'खीरमोहन' धान के संरक्षण हेतु प्रतिष्ठित Plant Genome Saviour Farmer Award (₹1.5 लाख) से सम्मानित किया गया। मिथिलांचल मखाना उत्पादक संघ को भी 10 लाख रुपये की पुरस्कार राशि के साथ Plant Genome Saviour Community Award प्रदान किया गया है। IPR सेल के माध्यम से कतरनी चावल, मगही पान, मिथिला मखाना सहित 5 GI टैग उत्पादों के लिए 1,481 अधिकृत उपयोगकर्ता पंजीकृत किए गए हैं।


स्टार्टअप और उद्यमिता में अव्वल

नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए स्थापित SABAGRIs (RKVY-RAFTAAR) मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय बन गया है। विश्वविद्यालय 46 स्टार्टअप सेल्स के प्रदर्शन में प्रथम स्थान पर रहा है। यहां इनक्यूबेटेड 79 से अधिक स्टार्टअप को ₹831 लाख की फंडिंग प्राप्त हुई है, जिससे 800 से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं।


बीएयू सबौर का सामुदायिक रेडियो स्टेशन (90.8 FM Green Sabour) और CRS बाढ़ को मुंबई में आयोजित World Audio Visual Summit (WAVES-2025) में गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय ने Excellence in Water Management और Regenerative Agriculture जैसे चार राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं। यह सिद्ध करता है कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर आज केवल बिहार ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कृषि शिक्षा और विकास का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है।

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