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कृषि समाचार

ICAR के पूर्वी अनुसंधान परिसर में 42 प्रतिभागियों को मिला 'राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम' का प्रशिक्षण

Raushan Kumar Raushan Kumar
Updated 9 January, 2026 7:09 PM IST
ICAR के पूर्वी अनुसंधान परिसर में 42 प्रतिभागियों को मिला 'राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम' का प्रशिक्षण

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने सार्वजनिक सेवा के मानकों को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। परिसर में “राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम” विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।


आपको बता दें कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम चार मॉड्यूल्स पर आधारित था। इसका मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों में यह समझ विकसित करना था कि संस्थान में उनका प्रत्येक कार्य—चाहे वह छोटा हो या बड़ा—किसानों और नागरिकों के जीवन पर किस प्रकार सकारात्मक प्रभाव डालता है। यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक ट्रेनिंग न होकर, सेवा भाव एवं स्वधर्म जैसे मूलभूत मूल्यों पर आधारित सोच में परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों द्वारा अर्जित ज्ञान का मूल्यांकन भी किया गया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. नचिकेत कोटवालिवाले, जो केंद्रीय कटाई उपरान्त अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, लुधियाना के निदेशक हैं, ने अपने संबोधन में प्रभावी सार्वजनिक सेवा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि निरंतर सीखने की प्रवृत्ति, ईमानदारी तथा नागरिकों के कल्याण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता किसी भी सरकारी कर्मचारी के लिए अत्यंत आवश्यक है।


उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका सीधा उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की मानसिकता, कौशल और व्यावसायिक दक्षता में परिवर्तन लाना है, जिससे वे देश के सामने खड़ी उभरती प्रशासनिक चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।


भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने भी इस अवसर पर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति, समर्पण और समाज की सेवा की सच्ची भावना के साथ सबसे कठिन लक्ष्यों को भी प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को अपने दैनिक कार्यों में अपनाने के लिए प्रेरित किया। विशेष रूप से, उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी महत्वपूर्ण यात्रा का सबसे कठिन हिस्सा उसे शुरू करना होता है—एक बार पहला कदम उठा लेने पर सफलता तक पहुंचना संभव हो जाता है।


इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वय सह-अध्यक्ष डॉ. पी. सी. चंद्रन, पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. रोहन कुमार रमण एवं डॉ. सौरभ कुमार द्वारा किया गया। संस्थान के मीडिया सदस्य सचिव श्री उमेश कुमार मिश्र ने जानकारी दी कि इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 42 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम की सफल समाप्ति पर सभी प्रतिभागियों को ऑनलाइन प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए।

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