नई दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन- वसन्तीय (रबी) अभियान 2025 में बिहार के उपमुख्यमंत्री-सह-कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य की कृषि प्रगति, चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की। इस सम्मेलन का उद्देश्य रबी अभियान 2025 के लिए कृषि क्षेत्र की दिशा तय करना था, जिसमें बिहार ने छोटे और सीमांत किसानों के सशक्तिकरण, डिजिटल नवाचारों और सतत कृषि पद्धतियों पर अपने प्रयासों को रेखांकित किया।
सिन्हा ने बताया कि बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ की 76% आबादी कृषि पर निर्भर है और 90% किसान छोटे एवं सीमांत श्रेणी में आते हैं। इन किसानों को सशक्त बनाना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। उन्होंने बागवानी, प्रसार सेवाओं और कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। बाजरे (श्री अन्न) को भविष्य का अनाज बताते हुए, उन्होंने दलहन उत्पादन में बिहार की चौथी रैंक का उल्लेख किया और सरसों, मूँगफली व सूरजमुखी जैसी तेलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया, जिसका लक्ष्य खाद्य तेलों में देश को आत्मनिर्भर बनाना है। “छोटे और सीमांत किसानों की प्रगति ही राज्य की वास्तविक कृषि उन्नति का पैमाना है,” एक ग्रामीण विकास विशेषज्ञ ने कहा।
बिहार कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की ओर तेजी से अग्रसर है। फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से 5.5 लाख किसानों को डिजिटल पहचान प्रदान की गई है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से उन तक पहुँच रहा है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए फसल-लचीली कृषि (क्रॉप रेजिलिएंट एग्रीकल्चर) को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस वित्तीय वर्ष में 470 प्रखंडों में ग्राम स्तरीय मिट्टी जाँच प्रयोगशालाएँ और 32 अनुमंडलों में मिट्टी परीक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना है, जिससे मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।
सिन्हा ने विश्वास व्यक्त किया कि फसल विविधीकरण, डिजिटल नवाचार और सतत कृषि प्रणाली जैसे मजबूत स्तंभों पर आधारित बिहार की कृषि प्रगति राज्य को खाद्य उत्पादन, पोषण और ऊर्जा सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभाने में सक्षम बनाएगी। इस अवसर पर कृषि विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।