बिहार सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और विषमुक्त अन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पौधा संरक्षण परामर्श योजना की शुरुआत की है। उप मुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत समेकित कीट प्रबंधन के माध्यम से कृषि परिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण किया जाएगा।
योजना का मुख्य उद्देश्य
इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य समेकित कीट प्रबंधन आधारित विधियों और घटकों का किसानों के हित में उपयोग सुनिश्चित करना है। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि विषमुक्त अन्न उत्पादन के माध्यम से मानव स्वास्थ्य का संरक्षण भी होगा।
पौधा संरक्षण पाठशालाओं की स्थापना
योजना की एक प्रमुख विशेषता यह है कि राज्य के सभी प्रखंडों की तीन-तीन पंचायतों में खरीफ मौसम के दौरान पौधा संरक्षण पाठशालाएं संचालित की जा रही हैं। प्रत्येक पाठशाला में 25 किसानों को समेकित कीट प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्यक्षण और प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम छह सत्रों में विभाजित है, जिससे किसानों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो सके।
कीटनाशी विक्रेताओं का प्रशिक्षण
योजना के तहत एक अनूठी पहल यह है कि प्रत्येक जिले में कीटनाशी विक्रेताओं को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक जिले में 25 विक्रेताओं को कीटनाशियों के सुरक्षित और उचित उपयोग के बारे में जानकारी दी जाएगी। इससे किसानों तक सही और सुरक्षित कीटनाशकों की पहुंच सुनिश्चित होगी।
जैविक घटकों पर जोर
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि कीट-व्याधि प्रबंधन के लिए जैविक घटकों के उपयोग को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे फसलों में होने वाली क्षति को प्रभावी रूप से कम किया जा सकेगा। शारदीय (खरीफ) मौसम में किसानों के खेतों में पौधा संरक्षण के जैविक घटकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया जाएगा।
आधुनिक तकनीकों का उपयोग
इस कार्यक्रम के अंतर्गत किसान निम्नलिखित आधुनिक तकनीकों का उपयोग करेंगे:
- जैव कीटनाशी
- बायो एजेंट
- फेरोमोन ट्रैप
- लाइफ टाइम ट्रैप
जानकारी के प्रसार की रणनीति
पौधा संरक्षण से संबंधित तकनीकी जानकारी के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए राज्य के सभी प्रखंड स्तरीय और जिला स्तरीय कार्यालयों में दीवार लेखन कराया जाएगा। इससे किसानों को सरल और सटीक जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
दीर्घकालिक लाभ
उप मुख्यमंत्री सिन्हा ने कहा कि ये उपाय न केवल फसल सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, बल्कि जैविक खेती को भी प्रोत्साहन देंगे। इसका प्रत्यक्ष परिणाम राज्य के किसानों की आय वृद्धि और कृषि क्षेत्र में स्थायित्व के रूप में दिखाई देगा।
यह योजना बिहार सरकार के पर्यावरण-अनुकूल कृषि और स्वस्थ भोजन उत्पादन के दृष्टिकोण को दर्शाती है, जो आने वाले समय में राज्य की कृषि व्यवस्था को और भी मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध होगी।