बिहार के उद्यान निदेशालय, कृषि विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय मखाना महोत्सव-2025 का उद्घाटन केन्द्रीय कृषि एव किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दीप प्रज्ज्वलन और शंखनाद कर किया। इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य मखाना उत्पादन को बढ़ावा देना, किसानों को सहायता प्रदान करना और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बिहार के मखाना को पहचान दिलाना है। यह आयोजन किसानों, उद्योग प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाने का काम कर रहा है।
चौहान ने बिहार की धरती को अद्भुत बताते हुए मखाना को किसानों के लिए वरदान और अनमोल रत्न करार दिया। उन्होंने घोषणा की कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में भारत सरकार ने राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन किया है, जिसका कार्यकलाप बिहार के किसानों के सुझावों के आलोक में निर्धारित होगा, ताकि मखाना को वैश्विक थाली में सम्मानजनक स्थान मिल सके। उन्होंने मखाना की खेती में अधिक उत्पादकता और कम लागत के लिए तकनीकी संस्थानों के माध्यम से सुगम यात्रीकरण को बढ़ावा देने, अनुसंधान एवं शोध पर विशेष ध्यान देने, तथा कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को प्रोत्साहित कर निर्यात को बल देने का आश्वासन दिया। सरकार खेत से बाजार तक, बीज उत्पादन से प्रसंस्करण और सामूहिक विपणन तक हर सूक्ष्म आवश्यकता पर किसानों को सहायता उपलब्ध कराएगी। मखाना के लिए एक सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना भी की जाएगी।
उप मुख्यमंत्री-सह-कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने महोत्सव को मखाना उद्योग के भविष्य को नई दिशा देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि मखाना केवल एक फल नहीं, बल्कि बिहार की विरासत और किसानों की समृद्धि का प्रतीक है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मखाना की खेती में तकनीकी नवाचार और सरकारी समर्थन, बिहार के जल क्षेत्रों में एक नई आर्थिक क्रांति लाने की क्षमता रखता है। सिन्हा ने बताया कि शोध संस्थानों और सरकारी योजनाओं के सफल कार्यान्वयन के कारण बिहार में मखाना का आच्छादन और उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। उन्हें विश्वास है कि राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन से किसानों को सुविधाएँ, प्रशिक्षण, निर्यात में सहूलियत और आर्थिक लाभ मिलेगा, जिससे गुणवत्तापूर्ण वैश्विक स्तर का मखाना राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुँच सकेगा।
प्रधान सचिव कृषि विभाग पंकज कुमार ने मखाना को बिहार की संस्कृति और विरासत का अभिन्न हिस्सा, खासकर मिथिलांचल और कोशी क्षेत्र की जीवनरेखा बताया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में अनुसंधान, नई तकनीकों के प्रयोग और विभागीय सहयोग से किसानों, उत्पादकों व प्रोसेसर को लगातार समर्थन मिलने की बात कही। महोत्सव के उद्घाटन सत्र में मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पूर्णिया से कोमल प्रिया और बबीता देवी, दरभंगा से महेश मुखिया और अमरजीत कुमार सहनी सहित कुल दस किसानों एवं एफपीओ को सम्मानित किया गया। मखाना प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने हेतु स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा उद्यमियों को ऋण के सांकेतिक चेक भी प्रदान किए गए, जिनमें दिलीप कुमार को 90 लाख, अविनाश ट्रेडर्स को 20 लाख और धाँधखोरा कृषि प्रगति एफपीओ को 9.95 लाख रुपये का ऋण शामिल है। इसके अतिरिक्त, 90 से अधिक किसानों को मखाना उत्पादन में सहयोग हेतु दो करोड़ तैंतीस लाख अड़तालीस हजार रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) भी प्रदान किया गया।
महोत्सव की अन्य प्रमुख झलकियाँ रहीं मखाना क्षेत्र की विकास यात्रा की पेशकश, "मखानाः संस्कृति से समृद्धि" पुस्तक का विमोचन, 100 तीन दिवसीय प्रशिक्षण रोडमैप "मखाना प्रशिक्षण महाकुंभ" का अनावरण, उद्यान निदेशालय, बिहार और एपीडा के बीच निर्यात प्रोत्साहन हेतु एमओयू हस्ताक्षर, तकनीकी सत्र और चर्चाएँ, साथ ही "मखाना रसोई संग्राम - खेत से प्लेट तक" जैसी सांस्कृतिक और प्रतिस्पर्धात्मक गतिविधियाँ, प्रदर्शनियाँ और क्रेता-विक्रेता सम्मेलन। इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग मंत्री हरि सहनी, राज्य किसान आयोग अध्यक्ष रूप नारायण मेहता, डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर के कुलपति डॉ॰ पी. एस. पाण्डेय, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर के कुलपति डॉ॰ डी. आर. सिंह, बागवानी आयुक्त डॉ॰ प्रभात कुमार और एपीडा सचिव डॉ॰ सुधांशु सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। यह आयोजन बिहार में मखाना उद्योग को नई ऊँचाईयों पर ले जाने और किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।