बिहार सरकार ने किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। राज्य के उप मुख्यमंत्री-सह-कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आज बताया कि राज्य भर में मिट्टी जाँच प्रयोगशालाओं का व्यापक विस्तार किया जा रहा है।
वर्तमान स्थिति और उपलब्धियाँ
राज्य में फिलहाल जिला स्तर पर 38 मिट्टी जाँच प्रयोगशालाएँ, अनुमंडल स्तर पर 14 प्रयोगशालाएँ और प्रमंडल स्तर पर 9 चलंत मिट्टी जाँच प्रयोगशालाएँ संचालित हो रही हैं। रेफरल प्रयोगशाला के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर और केंद्रीय मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला पटना भी कार्यरत हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 2.26 लाख मिट्टी नमूनों की प्राप्ति हुई है और 70,971 नमूनों का विश्लेषण पूरा किया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप 74,113 मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को वितरित किए गए हैं।
नई प्रयोगशालाओं की स्थापना
वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के 25 जिलों में कुल 32 नई अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जाँच प्रयोगशालाओं की स्थापना की जाएगी। इन प्रयोगशालाओं का वितरण इस प्रकार होगा:
सर्वाधिक प्रयोगशालाएँ: रोहतास, सुपौल, मधुबनी, सारण, पटना और पूर्वी चंपारण जिलों में 2-2 प्रयोगशालाएँ
एक-एक प्रयोगशाला: गोपालगंज, भभुआ, नवादा, भोजपुर, कटिहार, वैशाली, खगड़िया, अररिया, समस्तीपुर, गया, पश्चिम चंपारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, बेगूसराय, भागलपुर, पूर्णिया, मुंगेर और मधेपुरा में
जैविक उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण
वर्तमान में केवल पटना में एक जैव एवं कार्बनिक उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला कार्यरत है। इसे बढ़ाते हुए 2025-26 में भागलपुर, सहरसा और मुजफ्फरपुर में भी नई प्रयोगशालाएँ स्थापित की जाएंगी।
ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर
ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए भारत सरकार के सहयोग से ग्राम स्तरीय मिट्टी जाँच प्रयोगशालाओं का विकास किया जा रहा है। वर्तमान में 64 प्रखंडों में 72 ग्राम स्तरीय प्रयोगशालाएँ काम कर रही हैं। लक्ष्य है कि प्रत्येक प्रखंड में एक ग्राम स्तरीय प्रयोगशाला हो, जिसके लिए 470 नई प्रयोगशालाओं की स्थापना की जाएगी।
किसानों को होने वाले लाभ
उप मुख्यमंत्री सिन्हा ने बताया कि इस पहल से किसानों को कई प्रत्यक्ष लाभ होंगे:
- मिट्टी की उर्वरता की सटीक जानकारी
- उर्वरकों का संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग
- कृषि उत्पादन में निरंतर वृद्धि
- किसानों की आय में बढ़ोतरी
यह योजना राज्य में टिकाऊ और लाभकारी कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने में सहायक होगी।