बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर को मधुमक्खी पालन क्षेत्र में आजीविका और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी वित्तीय सफलता मिली है। विश्वविद्यालय को आईसीआईसीआई फाउंडेशन फॉर इन्क्लूसिव ग्रोथ, मुंबई से लगभग ₹56.64 लाख का अनुदान प्राप्त हुआ है। इस अनुदान का उपयोग विश्वविद्यालय परिसर में अत्याधुनिक शहद प्रसंस्करण एवं पैकिंग इकाई की स्थापना और मौजूदा अवसंरचना के आधुनिकीकरण एवं विस्तार में किया जाएगा। इस संबंध में आईसीआईसीआई फाउंडेशन और बीएयू, सबौर के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर विधिवत हस्ताक्षर किए गए हैं।
गौरतलब है कि इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह विश्वविद्यालय की वर्तमान शहद प्रसंस्करण क्षमता को प्रतिदिन 2 क्विंटल से बढ़ाकर 6 क्विंटल कर देगी। क्षमता में यह वृद्धि बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण, कठोर गुणवत्ता नियंत्रण और मजबूत विपणन की संभावनाएँ सुदृढ़ करेगी। विशेष रूप से, यह पहल बिहार के भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर एवं कटिहार जैसे प्रमुख मधुमक्खी पालन जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों झारखंड और पश्चिम बंगाल के किसानों को भी लाभान्वित करेगी।
परियोजना की संरचना दीर्घकालिक और सतत प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए की गई है, जिसमें उत्पाद विविधीकरण, मजबूत ब्रांडिंग और सुदृढ़ विपणन नेटवर्क का विकास शामिल है। इस पहल से स्थानीय मधुमक्खी पालकों द्वारा उत्पादित उच्च गुणवत्ता वाले शहद को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने में मदद मिलेगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय सृजन, रोजगार के अवसर एवं उद्यमिता विकास को बढ़ावा मिलेगा।
इस बात की जानकारी देते हुए माननीय कुलपति, बीएयू सबौर, डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि, "आईसीआईसीआई फाउंडेशन के साथ यह सहयोग मधुमक्खी पालन में मूल्य संवर्धन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह शहद प्रसंस्करण एवं पैकिंग इकाई किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ बिहार को गुणवत्तापूर्ण शहद उत्पादन के एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।"
वहीं, अनुसंधान निदेशक, बीएयू सबौर, डॉ. ए. के. सिंह ने बताया कि यह पहल विश्वविद्यालय की अनुसंधान एवं विस्तार रणनीति के पूर्णतः अनुरूप है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रसंस्करण, कौशल विकास और सुनिश्चित विपणन को एकीकृत कर यह परियोजना मधुमक्खी पालन को एक सतत एवं लाभकारी कृषि-उद्यम के रूप में विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।
परियोजना की व्यवहार्यता का मूल्यांकन आईसीआईसीआई फाउंडेशन के श्री श्रीकांत कुमार एवं श्री फणिंद्र मिश्रा द्वारा किया गया। शैक्षणिक स्तर पर इस परियोजना का नेतृत्व डॉ. रामानुज विश्वकर्मा एवं डॉ. आदित्य सिन्हा, प्रधान अन्वेषक (Principal Investigators) के रूप में कर रहे हैं।