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कृषि समाचार

बिहार कृषि विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी सफलता, सीआईपीएस नवाचार पुरस्कार 2024 से सम्मानित

AgriPress Staff AgriPress Staff
Updated 22 August, 2025 7:34 PM IST
बिहार कृषि विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी सफलता, सीआईपीएस नवाचार पुरस्कार 2024 से सम्मानित

बिहार सरकार के कृषि विभाग को आज एक गौरवपूर्ण सम्मान प्राप्त हुआ है। जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बिहार कृषि विभाग को प्रतिष्ठित सार्वजनिक प्रणालियों में नवाचार केंद्र (सीआईपीएस) नवाचार पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया। यह पुरस्कार श्रीनगर के पंडित भजन सोपोरी सभागार में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया।


दो श्रेणियों में मिला सम्मान

बिहार कृषि विभाग को यह पुरस्कार दो अलग-अलग श्रेणियों में प्रदान किया गया है। पहला, ग्रामीण विकास श्रेणी के अंतर्गत खेत से भाग्य तक मखाना के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाना की अभिनव पहल के लिए। दूसरा, आईटी श्रेणी में सरकारी योजनाओं में निहित अनुदान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित करने के उत्कृष्ट कार्य के लिए।


बिहार सरकार के कृषि विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने इस सम्मान को स्वीकार किया। समारोह में जम्मू और कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू सहित कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहे। बिहार कृषि विभाग से निदेशक उद्यान अभिषेक कुमार तथा संयुक्त निदेशक (शस्य) फसल एवं प्रक्षेत्र डॉ. राजेश कुमार भी इस महत्वपूर्ण अवसर पर सम्मिलित हुए।


उपराज्यपाल की प्रशंसा

माननीय उपराज्यपाल मनोज सिन्हा जी ने अपने विशेष संबोधन में बिहार कृषि विभाग की असाधारण उपलब्धियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मखाना उत्पादन के क्षेत्र में बिहार की सफलता ने राज्य को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक पहचान दिलाई है। यह ग्रामीण समुदायों के सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट और अनुकरणीय उदाहरण है।


उन्होंने डीबीटी प्लेटफॉर्म की अभूतपूर्व सफलता का उल्लेख करते हुए इसे पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार का आदर्श मॉडल बताया। उपराज्यपाल ने जोर देकर कहा कि इस प्रणाली से करोड़ों किसानों को प्रत्यक्ष लाभ सुनिश्चित हुआ है, जो भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी शासन व्यवस्था का प्रमाण है।


उप मुख्यमंत्री की बधाई और दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर कृषि विभाग और संपूर्ण बिहार को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने इस सफलता को बिहार के किसानों को सशक्त बनाने और कृषि क्षेत्र में नवाचार व पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक बताया।


श्री सिन्हा ने कहा, मखाना के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को सशक्त करना और सब्सिडी का प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्लेटफॉर्म का विकास, बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग और विशिष्ट पहचान दिलाता है। यह सफलता कृषि विकास के नए आयाम स्थापित करने में सहायक होगी।


सीआईपीएस का महत्व और उद्देश्य

हैदराबाद स्थित भारतीय प्रशासनिक कर्मचारी महाविद्यालय में स्थापित सार्वजनिक प्रणालियों में नवाचार केंद्र का मूलभूत उद्देश्य शासन-प्रशासन में नवाचार को प्रोत्साहित करना और उन्हें व्यावहारिक रूप देना है। इसके अतिरिक्त यह केंद्र राज्यों में संस्थागत एवं मानवीय क्षमताओं के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


यह केंद्र एक सुव्यवस्थित सलाहकार परिषद द्वारा संचालित किया जाता है, जिसमें भारत के सभी राज्यों का उचित प्रतिनिधित्व होता है। इसकी संचालन समिति राज्यों को रचनात्मक एवं नवाचार युक्त विचारों को व्यवहारिक और टिकाऊ प्रथाओं में परिवर्तित करने में सक्रिय सहायता प्रदान करती है।


मखाना: ग्रामीण सशक्तिकरण की सफल गाथा

पोषक तत्वों से भरपूर मखाना को वैश्विक स्तर पर सुपरफूड के रूप में स्थापित करने के लिए बिहार कृषि विभाग ने व्यापक और बहुआयामी प्रयास किए हैं। इस महत्वाकांक्षी पहल के अंतर्गत मखाना की वैज्ञानिक खेती के विस्तार, आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, बाजार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने और निर्यात संवर्धन पर विशेष जोर दिया गया है।


खेत से भाग्य तक की यह अनूठी पहल मखाना के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने में अत्यधिक सफल रही है। इस पहल से न केवल किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि ग्रामीण समुदायों को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिली है। यह पहल किसानों के लिए आर्थिक लाभ का एक मजबूत स्रोत बनने के साथ-साथ ग्रामीण सशक्तिकरण, समावेशी विकास और सतत कृषि की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।


डिजिटल क्रांति: डीबीटी प्लेटफॉर्म की अभूतपूर्व सफलता

बिहार कृषि विभाग की दूसरी बड़ी उपलब्धि सरकारी सब्सिडी के प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के लिए विकसित एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। यह तकनीकी नवाचार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में अत्यंत सफल साबित हुआ है।


इस अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को आधार आधारित सरल पंजीकरण और ऑनलाइन आवेदन की सुविधा प्रदान की गई है। इसकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 2 करोड़ से अधिक किसान (रैयत एवं गैर-रैयत दोनों श्रेणियों में) इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हो चुके हैं।


प्रभावशाली आंकड़े और सफलता दर

इस डिजिटल प्रणाली की सफलता के आंकड़े अत्यंत प्रभावशाली हैं। इसके अंतर्गत अब तक 2.28 करोड़ से अधिक ऑनलाइन आवेदनों को सफलतापूर्वक संसाधित किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लगभग 4300 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की गई है।


यह प्रणाली पूर्णतः पारदर्शी, स्वचालित एवं समय-समय पर ऑडिटेड है, जिसकी सफलता दर 97 प्रतिशत से भी अधिक है। यह आंकड़ा इस प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता और दक्षता का स्पष्ट प्रमाण है।


भविष्य की दिशा और दूरदृष्टि

यह प्रतिष्ठित पुरस्कार बिहार सरकार की उस व्यापक दूरदृष्टि का प्रतीक है जिसके अंतर्गत राज्य को कृषि एवं आईटी आधारित नवाचारों का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में निरंतर और सुव्यवस्थित प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि विभाग की यह असाधारण उपलब्धि किसानों की आय दोगुनी करने, ग्रामीण विकास को गति प्रदान करने और बिहार को कृषि नवाचार का मॉडल राज्य बनाने की दिशा में एक निर्णायक और सशक्त कदम है।


इस सफलता से प्रेरणा लेते हुए बिहार सरकार भविष्य में भी कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी प्रगति के लिए प्रतिबद्ध रहेगी, जिससे राज्य के किसानों को और भी बेहतर सुविधाएं और अवसर प्राप्त हो सकें। यह पुरस्कार न केवल बिहार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

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