कृषि प्रसार को आधुनिकता की ओर ले जाने के उद्देश्य से बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा 5 एवं 6 जनवरी 2026 को “डिजिटल कृषि: महत्व एवं संभावनाएँ” विषय पर एक महत्वपूर्ण दो दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम बामेती, पटना के सहयोग से संपन्न हुआ, जिसका मुख्य फोकस बिहार के किसानों, प्रसार कर्मियों एवं कृषि संस्थानों की आवश्यकताओं के अनुरूप डिजिटल प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना था।
सेमिनार के दौरान प्रतिभागियों को डिजिटल कृषि की अवधारणा, कार्यक्षेत्र और कीट-व्याधि प्रबंधन में डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग के बारे में गहन जानकारी दी गई। सत्रों में विशेष रूप से फसल प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं मशीन लर्निंग की बढ़ती भूमिका तथा किसान-केंद्रित सेवाओं के लिए मोबाइल अनुप्रयोगों एवं डिजिटल प्लेटफॉर्मों के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
इस बात की जानकारी देते हुए आयोजन सचिव डॉ. आदित्य सिन्हा ने बताया कि सेमिनार में आईसीटी आधारित कृषि परामर्श प्रणालियों के साथ-साथ ग्रामीण किसानों के लिए डिजिटल वित्तीय सेवाओं पर भी विस्तृत चर्चा हुई। इसमें डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन एवं औपचारिक ऋण प्रणाली तक पहुँच जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे। इसके अतिरिक्त, बिहार के भौगोलिक संकेत (GI) उत्पादों के प्रचार हेतु नवीन संचार विधियों, जैसे ऑडियो आधारित कहानी कहने एवं डिजिटल ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया गया। इन सत्रों ने स्पष्ट किया कि कृषि के भविष्य के लिए डिजिटल नवाचार कितने महत्वपूर्ण हैं।
बीएयू, सबौर के निदेशक, प्रसार शिक्षा, डॉ. एस. के. पाठक ने समापन सत्र में देश में कृषि के बदलते परिदृश्य पर अपने विचार रखे और डिजिटल प्रौद्योगिकियों तथा नवाचार आधारित प्रसार दृष्टिकोण के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कृषि को सशक्त बनाने हेतु नवाचार जरूरी है। कुल 78 प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता एवं संवाद में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट है कि कृषि प्रसार एवं परामर्श सेवाओं को सशक्त बनाने हेतु डिजिटल नवाचारों के प्रति रुचि निरंतर बढ़ रही है। डॉ. अभय मंकर, उप निदेशक प्रशिक्षण ने डिजिटल कृषि को बढ़ावा देने तथा प्रसार सेवाओं को सुदृढ़ करने हेतु विश्वविद्यालय द्वारा की गई विभिन्न पहलों पर चर्चा की।