बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर ने नववर्ष 2026 को ‘लक्ष्य और उत्पाद-विकास का वर्ष’ घोषित करते हुए राज्य के कृषि परिदृश्य को बदलने की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। कर्पूरी ठाकुर सभागार में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने की, जहां विश्वविद्यालय परिवार ने आत्ममंथन करते हुए नई ऊँचाइयों को छूने का संकल्प लिया।
इस बात की जानकारी देते हुए कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने सबसे पहले कृषि कैलेंडर–2026 और बिहार के अब तक के सबसे बड़े डिजिटल मृदा मानचित्रण परियोजना का उद्घाटन एवं विमोचन किया। गौरतलब है कि यह महत्वाकांक्षी मृदा मानचित्रण परियोजना 38 जिलों में तीन वर्षों में पूरी होगी, जिससे सीधे 60 विद्यार्थियों को रोजगार मिलेगा और किसानों को सटीक मिट्टी की जानकारी मिलेगी।
नीरा तकनीक ने बढ़ाया सामाजिक समावेशन
कुलपति ने कहा कि वर्ष 2025 विश्वविद्यालय के लिए उपलब्धियों का स्वर्णिम अध्याय रहा, जिसमें NAAC, NIRF जैसी राष्ट्रीय मान्यताएँ प्राप्त हुईं और मखाना कंपाउंड व मैंगो हाइड्रोजेल सहित छह पेटेंट हासिल हुए। उन्होंने विशेष रूप से 'नीरा तकनीक' की सफलता पर प्रकाश डाला, जिसके लिए अब अन्य देशों द्वारा भी संपर्क किया जा रहा है। यह तकनीक बिहार के पासी समुदाय के 10 लाख से अधिक किसानों के लिए आयवर्धन, स्वरोजगार और उद्यमिता के स्थायी अवसर विकसित कर रही है, जो तकनीक आधारित सामाजिक न्याय का सशक्त उदाहरण है।
PG सीटें दोगुनी, शोध में AI अनिवार्य
डीन (पीजी), डॉ. एस. के. पाठक ने बताया कि कुलपति के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने पीजी एवं पीएचडी की सीटें लगभग दोगुनी किए जाने, सर्वश्रेष्ठ शिक्षक एवं सर्वश्रेष्ठ पीएचडी थीसिस पुरस्कार प्रारंभ करने तथा तिलहन, दलहन एवं मखाना विषयों पर टॉप-अप फेलोशिप की घोषणा की। वहीं, 2026 के लिए मुख्य लक्ष्य 'उत्पाद-विकास' है। इसके तहत 'एक वैज्ञानिक–एक उत्पाद' अवधारणा को और प्रभावी बनाया जाएगा। डॉ. सिंह ने घोषणा की कि सभी वैज्ञानिकों से कार्य में कम से कम 10% आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग का आग्रह किया गया है, ताकि शोध की गुणवत्ता और गति बढ़ाई जा सके।
निदेशक छात्र कल्याण, डॉ. श्वेता शांभवी ने बताया कि अब सभी फेलोशिप कैशलेस एवं ऑनलाइन कर दी गई हैं। साथ ही, छात्र-स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत चिकित्सा सुविधा को 8 से 8 बजे तक बढ़ाया गया है।
सामुदायिक रेडियो स्टेशन हुआ केंद्रीय संचार ब्यूरो में सूचीबद्ध
विश्वविद्यालय की पहुंच का विस्तार करते हुए, डॉ. सिंह ने सभा को अवगत कराया कि बीएयू से संचालित सामुदायिक रेडियो स्टेशन एफएम ग्रीन को भारत सरकार के केंद्रीय संचार ब्यूरो (CBC) में सुचिबद्ध कर लिया गया है। इससे अब सरकारी विज्ञापनों का प्रसारण यहां से संभव हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, कुलपति ने मखाना पर विशेष फोकस करने की घोषणा करते हुए कहा, “मखाना मतलब बिहार और बिहार मतलब बीएयू।”
मानवीय सरोकार का परिचय देते हुए, कुलपति ने सर्द मौसम में कृषि महाविद्यालय (BAC) के फार्म एवं मृदा विज्ञान विभाग में कार्यरत 30 से अधिक श्रमिकों के बीच कंबल वितरण भी किया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों का योगदान विश्वविद्यालय की प्रगति में आधारशिला के समान है। कार्यक्रम का समापन कुलसचिव डॉ. मिजानुल हक के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।