बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में पांच दिवसीय प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन हेतु रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस अनुप्रयोग विषयक कार्यशाला का सफल समापन हुआ। 18-22 अगस्त तक चली इस कार्यशाला का आयोजन सबौर कंसल्टेंसी सर्विसेज (SABCONS) द्वारा मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग के तकनीकी सहयोग से किया गया।
राष्ट्रव्यापी सहभागिता
कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से 35 से अधिक छात्र-छात्राओं और संकाय सदस्यों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में ब्रेनवेयर विश्वविद्यालय (कोलकाता), एसएचयूएटीएस (प्रयागराज), आईटीएम विश्वविद्यालय (ग्वालियर), गलगोटिया विश्वविद्यालय (ग्रेटर नोएडा) और बिहार कृषि विश्वविद्यालय (सबौर एवं पूर्णिया कैंपस) के प्रतिनिधि शामिल थे।
विशेषज्ञ नेतृत्व
कार्यशाला का आयोजन कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के संरक्षण में हुआ। SABCONS के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अंशुमान कोहली ने मुख्य संयोजक की भूमिका निभाई, जबकि मुख्य मृदा सर्वेक्षण अधिकारी डॉ. वाई. के. सिंह सह-संयोजक रहे। आयोजन सचिव डॉ. भवानी प्रसाद मंडल तथा सह-आयोजन सचिव डॉ. इंगले सागर नंदुलाल एवं डॉ. चंद्रभान पटेल के सामूहिक प्रयासों से कार्यक्रम का सफल संचालन हुआ।
व्यापक तकनीकी पाठ्यक्रम
प्रशिक्षण कार्यक्रम में आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों का व्यापक पाठ्यक्रम शामिल था। प्रतिभागियों को निम्नलिखित विषयों में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया:
- रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस की मूलभूत अवधारणाएं
- जीपीएस एवं कोऑर्डिनेट सिस्टम
- डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग और वर्गीकरण तकनीकें
- डीईएम विश्लेषण और इंटरपोलेशन पद्धतियां
- जलग्रहण मॉडलिंग
- मशीन लर्निंग के माध्यम से डिजिटल मृदा मानचित्रण
- भूमि क्षरण मूल्यांकन
- ड्रोन इमेजरी से प्रिसीजन मृदा प्रबंधन
प्रतिष्ठित संस्थानों का योगदान
शैक्षणिक सत्रों को समृद्ध बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों का योगदान लिया गया। इनमें पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर (लुधियाना), आईसीएआर-एनबीएसएस एंड एलयूपी (उदयपुर), और पश्चिम बंगाल सरकार के विशेषज्ञ प्रमुख थे।
आधुनिक तकनीकों पर फोकस
कार्यशाला में ओपन-सोर्स जीआईएस टूल्स, गूगल अर्थ इंजन और ड्रोन इमेज प्रोसेसिंग पर विशेष जोर दिया गया। व्यावहारिक अभ्यास और सैद्धांतिक व्याख्यानों के संयोजन ने प्रतिभागियों के लिए सीखने का एक आदर्श माहौल बनाया।
समापन समारोह
कार्यशाला का समापन समारोह बीएयू के मिनी ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। इस अवसर पर डीन (कृषि) डॉ. ए. के. साह, निदेशक छात्र कल्याण डॉ. श्वेता शंभवी, और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
प्रतिभागियों की प्रशंसा
प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रशिक्षण की गुणवत्ता और सबौर में मिली आतिथ्य सत्कार की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने पांच दिवसीय प्रशिक्षण यात्रा पर आधारित एक रोचक वीडियो भी प्रस्तुत किया, जिसे सभी उपस्थितजनों ने सराहा।
डीन का संबोधन
अध्यक्षीय संबोधन में डीन (कृषि) डॉ. ए. के. साह ने आयोजन टीम को सफल कार्यशाला के लिए बधाई दी। उन्होंने आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों में युवा शोधार्थियों को प्रशिक्षित करने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन विश्वविद्यालय की शोध एवं कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाते हैं।
प्रमाणपत्र वितरण और सम्मान
समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। आयोजन टीम को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए और मंचासीन अतिथियों का सम्मान किया गया।
भविष्य की योजनाएं
कार्यशाला के सभी विषयों पर आधारित एक विस्तृत प्रशिक्षण पुस्तिका तैयार की जा रही है, जो शीघ्र प्रकाशित होगी। यह पुस्तिका रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस के क्षेत्र में कार्यरत छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री होगी।
कार्यक्रम का महत्व
यह कार्यशाला प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने और नई पीढ़ी के शोधकर्ताओं को अत्याधुनिक कौशल से लैस करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे कृषि क्षेत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम का समापन डॉ. इंगले सागर नंदुलाल के धन्यवाद ज्ञापन, सामूहिक फोटोग्राफी और जलपान के साथ हुआ। प्रतिभागी उपयोगी ज्ञान, व्यावहारिक कौशल और सबौर प्रवास की मधुर स्मृतियों के साथ अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए।