बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), साबौर ने राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) 2025 में कृषि एवं सहवर्ती क्षेत्र की श्रेणी में 36वां स्थान हासिल कर राज्य का मान बढ़ाया है। यह उपलब्धि बीएयू ने लगातार दूसरे वर्ष हासिल की है, क्योंकि विश्वविद्यालय ने 2024 की रैंकिंग में भी यही स्थान प्राप्त किया था। यह प्रदर्शन बिहार से एनआईआरएफ रैंकिंग में जगह बनाने वाले एकमात्र राज्य वित्तपोषित विश्वविद्यालय के रूप में बीएयू की कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार सेवाओं में मजबूत उपस्थिति को रेखांकित करता है।
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एनआईआरएफ, शिक्षण, अधिगम एवं संसाधन, अनुसंधान एवं व्यावसायिक प्रथाएं, स्नातक परिणाम, सामाजिक समावेशन और धारणा जैसे विभिन्न मानकों पर विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन करता है। लगातार दो वर्षों तक इन प्रतिस्पर्धी मानकों पर बीएयू साबौर का प्रदर्शन इसकी अकादमिक क्षमता और संस्थागत प्रतिबद्धता को स्पष्ट करता है। पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय ने स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रमों को मजबूत करने, उन्नत अनुसंधान सुविधाओं के विकास और किसानों तक पहुंच बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है।
बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है, और बीएयू ने नवाचारों को बढ़ावा देने, जलवायु सहनशील फसल किस्मों के विकास और सतत खेती के लिए मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तकनीकों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के मार्गदर्शन में, जिन्होंने जनवरी 2023 में कार्यभार संभाला था, विश्वविद्यालय ने अनुसंधान, पेटेंट और सहयोगात्मक परियोजनाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन, प्रौद्योगिकी प्रसार और विद्यार्थियों व ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल-आधारित प्रशिक्षण पर जोर देकर, बीएयू ने कृषि क्षेत्र की नई चुनौतियों के अनुरूप अपनी भूमिका को और प्रभावी बनाया है।
इस सफलता में बीएयू के संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों का योगदान भी सराहनीय है। राष्ट्रीय स्तर की अनुसंधान परियोजनाओं में उनकी सक्रिय भागीदारी और बिहार के हाल ही में शुरू हुए चौथे कृषि रोडमैप में विश्वविद्यालय की प्रमुख भूमिका ने इसकी साख को और मजबूत किया है। यह रोडमैप सतत विकास, नवाचार और किसानों की भलाई पर केंद्रित है, जिसमें बीएयू को एक प्रमुख ज्ञान केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।
इस अवसर पर, कुलपति ने विश्वविद्यालय परिवार और सभी हितधारकों को बधाई देते हुए कहा, भारत के शीर्ष कृषि विश्वविद्यालयों में लगातार अपनी जगह बनाए रखना बिहार के लिए गर्व की बात है। लेकिन हमें अनुसंधान की गुणवत्ता, व्यावसायिक प्रथाओं और धारणा के क्षेत्र में और सुधार करना होगा ताकि हम रैंकिंग में और ऊपर जा सकें। यह पहचान विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता की दिशा में और अधिक प्रयास करने के लिए प्रेरित करती है।